Wednesday, September 23, 2020

161 बोझ, मोह का ? ?

बाल्यावस्था  से ही,  जंगल से सूखी लकड़ियों का गट्ठा सिर पर लाद कर लाना और शहर में बेचना यही दिनचर्या थी बेनीबाई की। इस प्रकार जीविका चलाते चलाते बृद्धावस्था भी आ पहॅुंची। एक दिन अनेक प्रयास करने पर भी जब गट्ठा सिर पर रखते न बना तो हताश बेनीबाई बोली, 

‘‘ हे भगवान ! अब तो भेज दो मौत को? बहुत हो चुका, अरे! बहरे हो गए हो क्या ? कब सुनोगे ?’’

कहने की देर ही हुई थी कि यमराज सामने आकर बोले,

‘‘ चलो, बेनीबाई ! मैं आ गया ’’

‘‘ लेकिन कहाॅं?’’

‘‘ अरे! तुम्हीं ने तो भगवान से कहा कि मौत को भेज दो, मैं हॅंू यमराज, उनकी आज्ञा से मैं तुम्हें ले जाने के लिए आया हॅूं , चलो.. ’’

‘‘ ये तो बहुत अच्छा किया भैया, चलो, जरा अपना एक हाथ इस गट्ठे पर लगा कर मेरे सिर पर रखवा देा । ’’ 


No comments:

Post a Comment

221 चिंजा की शादी

5 वीं क्लास में पढ़ रहीं स्वभाव से सीधी सादी सहुद्रा और भोली सी चिंजा में गहरी दोस्ती थी। चिंजा की स्पष्टवादिता से क्लास के सभी लड़के लड़किय...