बड़े ही उद्दण्डी और विगड़ैल छात्र प्रमोद के कारण क्लास ‘ग्यारहवीं बी ’ में जाने से शिक्षक डरने लगे थे और आए दिन प्राचार्य से शिकायत करते परन्तु स्थानीय प्रसिद्ध क्रिमिनल लायर का बेटा होने के कारण वे कुछ न कर पाते। एक दिन कुछ शिक्षक प्राचार्य से कह ही रहे थे कि प्रमोद को रेस्टीकेट कर दो नहीं तो हम उस क्लास में नहीं जाऐंगे कि इसी बीच एक नवयुवक ने प्राचार्य को अपना नवीन नियुक्ति पत्र दिखाते हुए भीतर आने की अनुमति चाही। पेपर्स जाॅंच करने के बाद प्राचार्य बोले,‘‘ ठीक है, ज्वाइन करो और क्लास ‘इलेवन्थ बी’ में चले जाओ आप उसी क्लास के क्लास टीचर रहेंगे।’’
अपेक्षतया कम उम्र के नये शिक्षक को देख प्रमोद सहित उसके अन्य साथियों ने अपनी कलाएं दिखाना शुरु कर दी, शिक्षक कुछ भी बोर्ड पर लिखते उधर पीछे से अजीब प्रकार की आवाजें आने लगतीं। शिक्षक जब मुड़कर पीछे देखते, वे सब इतने शाॅंत और तल्लीन हो जाते कि शिक्षक आश्चर्य में पड़ जाते। वे जब पूछते कि यह आवाजें कौन करता है तो कोई भी छात्र नहीं बताता। प्रायः रोज ही यह घटित होता, युवा शिक्षक के मन में क्रोध तो आता पर नये होने के कारण क्रोध को दबा कर रह जाते। एक दिन वह कुछ भी पढ़ाने के बदले अपनी कुर्सी पर आॅंखों को दोनांे हथेलियों से बंद किए बैठकर क्लास की गतिविधियों को चुपचाप देखने का प्रयत्न करने लगे। अचानक प्रमोद ने अपने आगे बैठे छात्र की गर्दन पर जोर से फूंका, वह घबराकर पीछे देखने लगा, शिक्षक ने तत्काल उसके पास जाकर पूछा,
‘‘क्या बात है?’’
‘‘ सर! पीछे से प्रमोद ने कुछ कहा इसलिए... ’’
‘‘ कौन है प्रमोद, खड़े हो?’’
प्रमोद नाटकीय ढंग से, अट्टहास की मुद्रा में खड़ा हो गया मानो शिक्षक उसके सामने तुच्छ हों और बनावटी भर्राई आवाज में बोला,
‘‘ मैं ने क्या किया, मैंने कुछ नहीं किया, क्यों रे राजेश! झूठ बोलता है, निकलना बाहर बताता हॅूं।’’
शिक्षक समझ गए कि असली कारण प्रमोद ही है, वे उसे समझाते हुए बोले,
‘‘ प्रमोद! यदि तुम्हें नहीं पढ़ना है तो क्लास में आते ही क्यों हो; कम से कम उनको तो पढ़ने दो जो पढ़ना चाहते हैं, इस तरह तो तुम दस साल तक पास नहीं हो सकोगे, समझे? अब बैठो और ध्यान से पढ़ो परीक्षा आने वाली है।’’
‘‘ हमें फेल कर दोगे, धमकी दे रहे हो?’’
‘‘ बड़ा हॅूं इसलिए समझा रहा हॅूं, नहीं तो अभी सुधार देता।’’
सुनकर प्रमोद आगबबूला होकर क्लास के बाहर यह कहते हुए चला गया कि स्कूल के बाहर देखते हैं कौन किसको सुधारता है। शिक्षक ने प्राचार्य को घटना की जानकारी दी पर प्राचार्य हमेशा की तरह असमर्थ ही रहे अतः, शिक्षक स्वयं घर का पता लगाकर शाम को प्रमोद के घर पहॅुचे और उसके पिता को जानकारी दे ही रहे थे कि प्रमोद भी घर आ पहॅुचा। पिता ने उसे डाॅंटा और पूंछा कि वह शिक्षकों से दुव्र्यवहार क्यों करता है, इस पर वह बोला,
‘‘ ये फेल कर देने की धमकी देते हैं बार बार कहते हैं कि तुम दस साल तक पास नहीं हो सकते।’’
‘‘अरे गधे! तू समझता है वह सचमुच फेल कर देंगे? वह इसलिए कहते हैं कि तू ठीक ढंग से पढ़कर अच्छे नंबरों से पास हो। यह कहना तो छिपा हुआ वरदान ही माना जाता है, कान खोलकर सुन ले, अगली बार स्कूल से कोई शिकायत आई तो घर से निकाल दूंगा।’’
‘‘ अच्छा! तो आप भी इन्हीं की तरह धमकी दे रहे हैं? ठीक है, आपके निकालने से पहले ही मैं निकल जाता हॅूं, भूखे तो नहीं मर जाऊंगा’’ और वह दौड़कर बाहर चला गया।
पिता ने सोचा कि भूख लगेगी तो अपने आप वापस आ जाएगा, पर कई दिन हो गए वह नहीं लौटा। घर से जाते समय रास्ते में कुछ लड़कों से उसने सुना कि वे ‘एस ए एफ बटालियन’ में भरती होने जा रहे हैं; बस प्रमोद भी उन्हीं के साथ चला गया और सिपाही के लिए सिलेक्ट हो गया। ट्रेनिंग के दौरान वालीवाल का ऐसा खिलाड़ी बना कि बटालियन में पोस्टिंग के बाद प्रादेशिक स्तर पर ‘एस ए एफ’ की टीम का नेतृत्व कर ‘राज्य वालीवाल ट्राफी’ जीत ली। एकेडेमी में आयोजित सम्मान समारोह में आई जी पुलिस ने प्रमोद को सम्मानित करते हुए कहा,
‘‘ हमें गर्व है कि इस बटालियन को शिखर पर पहॅुंचाने में बहादुर लड़ाकू सिपाही ही नहीं उत्तम खिलाड़ी सिपाहियों का भी योगदान है। प्रमोद के पेरेंट्स महान हैं जिन्होंने अपने बहादुर और खिलाड़ी बेटे को देश की रक्षा के लिए सौंपा है, ऐसे बेटे ही इतिहास की रचना करते हैं।’’
जैसे ही स्टेज पर प्रमोद ट्राफी लेने पहॅुचा उसकी नजर आडिऐंस में बैठे अपने पिता पर जा टिकी, वह ‘आइजी’ से बोला,
‘‘सर! निवेदन है कि आपके द्वारा बटालियन को दी जाने वाली यह ट्राफी मेरे स्थान पर मेरे पिताजी के हाथों में सौंपी जाए।’’
यह एनाउंसमेंट सुनकर प्रमोद के पिता, अपनी आंखों में संकोचमिश्रित आंसुओं को जबरन रोकते दिखाई दे रहे थे।