Tuesday, September 29, 2020

181 बाप का बाप

‘‘ हेलो, क्या मैं हीरालाल जी से बात कर सकता हॅूं?’’

‘‘ जी! मैं हीरालाल बोल रहा हॅूं, कहिए क्या बात है?’’

‘‘ हीरालाल जी ! मैं इन्श्योरेंस के हेड आफिस दिल्ली से विवेक बोल रहा हॅूं, आपकी इन्श्योरेंस पोलिसीज के संबंध में कुछ जानकारी देना चाहता हॅूं’’

‘‘ जी ’’

‘‘ पिछले माह जो पोलिसी मेच्योर हुई है, उसका बोनस एक लाख पन्द्रह हजार तीन सौ बारह रुपये बना है, आपके ऐजेंट ने आपको बताया या नही?’’

‘‘ नहीं। वैसे मुझे तो मालूम ही नहीं है सर, कि बोनस क्या होता है।’’

‘‘ अरे! इसी कारण तो सरकार ने हमें क्रास चैक करने के लिए हेड आफिस में बिठाया है कि कस्टोमर्स को सही समय पर मदद की जा सके। अभी लास्ट डेट समाप्त होने को तीन दिन शेष हैं, आप मुझे अपनी पोलिसी के डिटेल्स, बेंक खाता नंबर और पता बता दीजिए ताकि मैं आगामी कार्यवाही कर आपको सूचित कर सकॅूं।’’

‘‘ सर, बहुत धन्यवाद। मैं सभी कागजाद एक दो घंटे में ढूंड कर आपको बताता हॅूं, परन्तु मैं चाहॅूंगा कि आप अपना नाम, पिता का नाम, उम्र, पत्राचार का पता और फोन नम्बर आदि लिखा दें तो मुझे संपर्क करने में सुविधा होगी।’’

‘‘ लेकिन पिता के नाम, पता आदि की क्या जरुरत है, फोन नंबर तो यही है जिससे आप बात कर रहे हैं’’

‘‘ सर, बात ये है, कि पुलिस में एफ आई आर दर्ज कराते समय इनकी जरूरत पड़ती है।’’

‘‘ अबे साले! तू तो मेरे बाप का . . . .।’’ 


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