Saturday, August 1, 2020

58 विश्वगुरु


इतिहास के शिक्षक अपने छात्रों को समझा  रहे थे कि कभी हमारा भारत ...
-इतना स्वर्णसम्पन्न था कि अन्य देश उसे सोने की चिड़िया कहते थे,
-इतना ऊर्वर और शुद्धपर्यावरण सम्पन्न था कि दूध की नदियाॅं बहतीं थीं और सभी लोग बलिष्ठ थे,
-इतना ज्ञानसम्पन्न था कि सभी उसे विश्वगुरु मानते थे  ।
पर , अब इन सभी क्षेत्रों में विपन्न हो गया है......।

एक छात्र ने पूछा, सर! इसका कारण क्या है?

शिक्षक ने समझाया.. ...
   इन तीनों घटकों के तीन संयुक्त कारण हैंः
- क्रिकेट अर्थात् भ्रष्टाचार,
- राजनीति अर्थात् स्वार्थनीति,
- फिल्में अर्थात् अनुन्नत ज्ञान प्रसार।

छात्रों ने पूछा, क्या हमारा पुराना स्तर फिर से प्राप्त नहीं किया जा सकता?

शिक्षक बोले ... क्यों नहीं... ?
पर...? क्या तुम लोग यह सचमुच चाहते हो?

पिन ड्राप सायलेंस... ... ।

57 कड़ुआ व्रत


नगर की प्रसिद्ध मिठाई की दूकान पर एक दिन महिलाओं की भीड़ देख उत्सुकता वश  उस ओर मेरीआँखे और कान त्वरित गति से जा पहुंचे । हलवाई और उसके दो ग्राहक मित्र चर्चा कर रहे थे।
- शायद आज कोई महिलाओं का व्रत है इसी लिये दूकान पर इतनी भीड़ है।
- अरे ! आज नहीं कल कडुआ चौथ  है न। क्यों भाईसाहब?
- अबे कड़ुआ नहीं करवा चौथ !
- अरे...! मेरे लिये तो कड़ुआ ही है।
- क्यों?
- इसलिये कि आठ दस हजार की दच्च लगेगी।
- अजीब बात है व्रत तो महिलाओं का है उसमें तुझे क्या?
यह सुनकर हलवाई बोला, तुम क्या जानों ये प्रपंच, अकेले हो न? जब पत्नी आयेगी तब समझोगे, महिलायें यह व्रत अपने अपने पतियों की दीर्घायु के लिये करतीं है हः हः हः।
-तो? ?...
-तो  पति का फर्ज भी कुछ बनता है कि नहीं, कम से कम एक बढ़िया साड़ी और एक सोने की अंगूठी तो उपहार में देना ही पड़ेगी? तभी तो प्रकट होगा कि दोनों  के प्रेम में कितनी प्रगाढ़ता है। .....ये भाई साहब, इसी दच्च की बात कर रहे हैं......।
- अरे! यह भी कोई बात हुई? मेरे भोजन न करने से हो सकता है कि मेरे स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़े और मेरी आयु भी बढ़ जाये परंतु किसी और की आयु कैसे बढ़ सकती है?
- यार ! बात तो तूने सही कही है पर जब से इन टीव्ही सीरियलों ने धूम मचाई है तब से किसी क्षेत्र विशेष  तक सीमित रहने वाली स्थानीय रूढ़िवादी परंपराओं का लगातार प्रसार हो रहा है, और महिलायें अपने को उनमें ढाल रही हैं।.... पहले ये सब अपने एरिया में कहाॅं होते थे?
- लेकिन यार! यह बात अवश्य  सोचने विचारने की है कि साल में प्रत्येक माह में अनेक इस प्रकार के व्रत, उपवास और पूजापाठ के प्रदर्शन  महिलाओं में ही क्यों देखे जाते हैं? ? ?... ...
इन बातों को सुनकर हलवाई बोला,
-सब आडंबर है.... जो अंतरंग प्रेमी होते हैं वे हृदय से इसे अनुभव करते हैं और अपने आचरण, स्नेह और समर्पण से सब को मोह लेते हैं चाहे वे पति पत्नी हों, भाई बहिन या माता पिता। उन्हें परस्पर यह कहना नहीं पड़ता कि ‘‘आई लव यू‘‘ / ‘‘ आई लव यू टू‘‘। इस के प्रदर्शन  के लिये उन्हें कोई व्रत या उपवास भी, कभी नहीं करना पड़ता....।
यह सुन कर मेरे मन में उस निर्माणाधीन मकान में मजदूरी कर रहे जग्गू ,उसकी  पत्नी और दो बच्चों के बीच पारस्परिक समन्वय और समर्पण का दृश्य  कौंध गया।

221 चिंजा की शादी

5 वीं क्लास में पढ़ रहीं स्वभाव से सीधी सादी सहुद्रा और भोली सी चिंजा में गहरी दोस्ती थी। चिंजा की स्पष्टवादिता से क्लास के सभी लड़के लड़किय...