Thursday, April 9, 2020

(6) सबसे मधुर चीज

 सबसे मधुर चीज
उन दिनों वायुयान नहीं थे इसलिए विदेश यात्रायें पानी के जहाज से की जाती थीं। बंगाल के प्रसिद्ध हास्यव्यंग के कवि श्री चटर्जी को चीन से कविसम्मेलन का निमंत्रण मिला । उन्होंने लगभग एक माह के हिसाब से जाने की तैयारी करने के लिए आटा, दाल, चावल, सिल बट्टा, ईंधन, सिगड़ी, कपडे, बिस्तर आदि को रखा । जिस दिन जाने लगे तो बंदरगाह पर विदाई करने अन्य स्थानीय छोटे बड़े सभी स्तरों के कवि लोग पहुंचे। सभी ने उनका सामान उनकी सीट के आसपास रख दिया। चटर्जी साहब अपने साथ एक विस्कुट वाले टिन के डब्बे को बड़े सम्हाल कर लिए हुए चढ़े और उसे अपने पास ही रख लिया।  अन्य सभी लोग भी आसपास बैठे और  जहाज चलने की प्रतीक्षा करने लगे। इधर उधर की बातें होते होते एक नए कवि की नजर बिस्कुट वाले टिन पर पड़ी। उसने पूंछा, ‘‘दादा! मेरी जानकारी में, चीन में तो संसार के सबसे अच्छे बिस्कुट मिलते हैं फिर आप बिस्कुट का पूरा टिन,  इंडिया से वहां ले जा रहे हैं? यह बात अजीब नहीं है ?’’
चटर्जी साहब बोले , ‘‘अरे, उसमें बिस्कुट नहीं हैं।’’
 उसने पूंछा, ‘‘तो उसमें ऐसा क्या है जो आप बड़े सम्हाल कर अपने पास ही रखे हैं ?’’
 वे बोले, ‘‘ उसमें  क्या हो सकता है तुम ही बताओ ?’’
 एक कवि बोले ,‘‘ खाने की ही बढ़िया चीज होगी ! अब जो भी हो, क्यों है न ?’’
उन्होंने कहा , ‘‘तुम लोग ही अनुमान लगाओ क्या हो सकता है।’’
 इतने में एक अन्य बोला, ‘‘ अरे! भुंजे चना होंगे, जब इच्छा होगी खाते जाएंगे ।’’  किसी और ने भी इसका समर्थन किया , पर चटर्जी साहब बोले ‘‘नहीं चने नहीं , और कुछ है।’’  
एक दूसरा बोला, ‘‘दादा! मुरमुरे होंगे  वे खाने में मजेदार  होते हैं ? ’’
 किसी ने कहा मूंगफली, और एक के बाद एक अनुमान प्रकट किये जाते रहे तथा चटर्जी साहब सबको नहीं, यह नहीं है, यह नहीं है, कहते जाते थे।  बड़ी देर हो गयी तब उनके समान आयु के ही एक कवि ने कहा, ‘‘अब आप ही रहस्योदघाटन क्यों नहीं कर देते , बेचारे लड़के परेशान हो गए? ’’  
वे बोले, ‘‘अरे भाई! तो, आप ही बताओ न कि लोगों को सबसे अधिक क्या पसंद होता है ?’’
 फिर अपने अपने ढंग से लोग सुझाव देते गए पर वे नहीं माने और बोले, ‘‘लोगों को तो सबसे प्रिय होती है जुगुप्सा यानि परनिन्दा, है कि नहीं? उसमें जितना आनंद लोगों को मिलता है किसी अन्य चीज में नहीं।’’
  सबको विस्मयबोधक हँसी आ गयी, परन्तु पहले वाले कवि ने फिर से पूंछा, ‘‘लेकिन इस टीन में किसकी निंदा भरी है ?’’
 वे बोले, ‘‘ खुद ही खोल कर देख लो न ? ’’
उसने खोल कर देखा तो उसमें काली मिटटी भरी हुई थी, वह बोला, ‘‘ दादा! इसमें तो काली मिटटी भरी है?’’
 वे बोले,‘‘ हाँ ! चीन जा रहा हूँ न, लेट्रिन तो जाना ही पड़ेगा पर चीनी मिटटी से हाथ कैसे साफ हो सकेंगे, इसलिए अपने देश की मिट्टी साथ ले जा रहा हूँ। 
सभी के जोर से ठहाका मार कर हंसने की तेज ध्वनि ने जहाज को चलने का संकेत दे दिया।   

221 चिंजा की शादी

5 वीं क्लास में पढ़ रहीं स्वभाव से सीधी सादी सहुद्रा और भोली सी चिंजा में गहरी दोस्ती थी। चिंजा की स्पष्टवादिता से क्लास के सभी लड़के लड़किय...