Wednesday, August 12, 2020

60 विधिवेत्ता


भोपाल से सागर वाली बस में यात्रा करते हुए रायसेन में एक नवयुवक जो पहनावे से वकील लगता था, मेरे पास वाली सीट पर बैठ बस के चलने में देरी का आभास पाकर सिगरेट पीने लगा। उसे देख पीछे बैठे कुछ लोग भी अपनी बीड़ी सुलगाने लगे। पहले तो मैं ने सोचा कि इन्हें रोकूॅं पर अनावश्यक विवाद को टालने के लिये स्वयं ही बस से उतर कर ड्राइवर के आने और उसकी सिगरेट के खत्म होने की प्रतीक्षा करने लगा।

पाॅंचदस मिनट इधर उधर घूमकर काटे फिर ऊब होने के कारण बस में अपनी सीट पर जाने लगा तब तक युवक की सिगरेट जलकर फिल्टर तक पहुॅंच चुकी थी फिर भी लगता था कि वह उसे अपने होठ जलने का आभास मिलने पर ही फेकेगा। मेरे मौन के धैर्य की सीमा टूटी और मुझे कुछ क्रोधित स्वर में कहना पड़ा कि ‘‘ अब तो फेक दो‘‘। शायद उसे, मेरे जैसे साधारण से व्यक्ति से कभी इस प्रकार के शब्दों की अपेक्षा न रही हो अतः अपने अहंकार पर आघात समझ वह बोला ‘‘यदि ड्राइवर बीड़ी पी रहा होता तो शायद ही आप उससे कुछ कहने का साहस कर पाते‘‘?

मैं ने कहा ‘ महोदय! वेशभूषा से तो आप एक ला ग्रेजुएट लगते हैं, पर धिक्कार है! आप अपने को  सम्भवतः एक अल्पशिक्षित़ ड्राइवर से तुलनीय मानते हैं? क्या मुझे आपको माननीय सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का स्मरण कराना चाहिये जो सार्वजनिक स्थानों और कार्यस्थलों पर धूम्रपान को दंडनीय घोषित करता है? 

यह सुनकर उसकी भौहें चढ़ गयीं और आंखें रक्ताभ हो काले कोट को चिढ़ाने लगीं। बहस बढ़ते देख सामने की सीट पर बैठे सज्जन बोले, भाईसाब! छोड़िये बकीलों का तो काम ही है सही को गलत और गलत को सही करना इन्हें इसीलिये तो ‘लाइयर‘ कहते हैं। 

युवक कुछ कहने को ही था कि ड्राइवर अपनी सीट पर आ बैठा। एक पैसिंजर ने कहा बड़ी देर तक रुके रहे ड्राइवर साब ! क्या बात है?  वह बोला बीड़ी पीना थी इसलिये एकान्त में चला गया था।

उसने जोर से हार्न बजाया, पैसेंजर बैठने लगे, बस आगे जाने लगी, बकीलसाब का सिर .....


59 संसार की वर्तमान स्थिति

 

यक्ष ने युधिष्ठिर से पूछा, महाराज! यह भौतिक संसार कैसा चल रहा है अर्थात् उसकी क्या स्थिति है , उसका हालचाल बतायें ?

युधिष्ठिर बोले, यह भौतिक संसार एक बहुत बड़ी ‘कड़ाही‘ के समान है जिसे सूर्य ‘ऊष्मा‘ दे रहा है , दिन और रात ‘ईंधन‘ की तरह जल रहे हैं, बदलते हुए मौसम   ‘डोलती कलछी‘ की तरह समय ‘रसोइया‘ अपने हाथ में लिये सभी जीवों को उस बड़ी कड़ाही में भून रहा है।

इस अज्ञानता भरे दुखपूर्ण भौतिक संसार की वर्तमान में यही स्थिति है, उसका यही हालचाल है।


221 चिंजा की शादी

5 वीं क्लास में पढ़ रहीं स्वभाव से सीधी सादी सहुद्रा और भोली सी चिंजा में गहरी दोस्ती थी। चिंजा की स्पष्टवादिता से क्लास के सभी लड़के लड़किय...