यक्ष ने युधिष्ठिर से पूछा, महाराज! यह भौतिक संसार कैसा चल रहा है अर्थात् उसकी क्या स्थिति है , उसका हालचाल बतायें ?
युधिष्ठिर बोले, यह भौतिक संसार एक बहुत बड़ी ‘कड़ाही‘ के समान है जिसे सूर्य ‘ऊष्मा‘ दे रहा है , दिन और रात ‘ईंधन‘ की तरह जल रहे हैं, बदलते हुए मौसम ‘डोलती कलछी‘ की तरह समय ‘रसोइया‘ अपने हाथ में लिये सभी जीवों को उस बड़ी कड़ाही में भून रहा है।
इस अज्ञानता भरे दुखपूर्ण भौतिक संसार की वर्तमान में यही स्थिति है, उसका यही हालचाल है।
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