मजदूरों और कृषि मजदूरों के बीच एक नेताजी भाषण दे रहे थे-
‘‘मेरे भाइयो इस देश में सबसे अधिक संख्या मजदूरों और कृषि मजदूरों की है और धनवानों तथा जमींदारों की संख्या अंगुलियों पर गिनने लायक परंतु सबसे अधिक शोषण मजदूरों और कृषि कार्य में लगे मजदूरों का ही होता है, उन्हें उनकी मेहनत का उचित मेहनताना नहीं मिलता। इनकी मेहनत पर ये सब ऐश करते हैं और मजदूर भरपेट भोजन को तरसते हैं। क्या आप लोग इसी प्रकार लुटते रहना चाहते हैं? मैं कहता हॅूं कि सभी मजदूर एक होकर इस अधिकार की माॅंग क्यों न करें कि जो खेतों में काम करता है जमीन उसी की होना चाहिये न कि उनकी जो एसी में बैठे हमारे ऊपर हुुकुम चलाते हैं कि जाओ खेतों में काम करो, और हमारे पराक्रम पर कृषि पंडित कहलाते हैं।‘‘
’’ भीड़ में कुछ लोग कानाफूसी करने लगे, वाह! हमने इतना तो कभी सोचा ही नहीं, नेताजी सही कहते हैं, हमारे लिये यही करना चाहिये...‘‘
फिर, नेता जी ने प्रश्न किया "अब बोलिये आप लोगों का क्या कहना है?"
यह सुनकर भीड़ में से एक शिक्षित बेरोजगार युवा बोला-
‘‘ इस प्रकार तो म्युनीसिपल के सभी स्वीपर कहने लगेंगे कि जो सड़कें वे साफ करते हैं उन पर उनका ही अधिकार है, वे किसी को उन पर क्यों चलने दे?... या कि बाल बनाने वाले नाई कहने लगें के ये सिर तो हमारे हैं क्योंकि........‘‘
नेता जी की हालत.....? ? ?