Friday, June 12, 2020

39 पेटू


गाॅंव के एक सम्पन्न व्यक्ति ने किसी अवसर पर आयोजित भंडारे में सभी प्रतिष्ठत लोगों को आमंत्रित किया। पुजारी जी भी अपने परिवार सहित भोज में पहॅुचे । विभिन्न व्यंजन परोसे गए, सभी लोग प्रसन्नता से भोजन कर रहे थे कि पुजारी ने अपने बड़े लड़के को खाने के बीच बीच में बार बार पानी पीते देख पहले तो इशारे  से समझाना चाहा कि इतना पानी क्यों पी रहा है  परंतु जब उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा तो उन्होंने उसके गाल पर एक थप्पड़ जोर से लगा दिया।
लड़का बोेला, "क्यों क्या बात है?"
पुजारी बोले, "मूर्ख ! पानी तो रोज पीता है यह व्यंजन रोज नहीं मिलते, यदि पानी ही पीता रहेगा तो इन व्यंजनों के लियेे पेट में जगह ही नहीं रहेगी? इतनी अक्ल नहीं है क्या?"
लड़का बोला, "नहीं बापू ! पानी पीने से खाया गया भोजन नीचे दबता जाता है इसलिये और अधिक व्यंजन खाने के लिये जगह रिक्त होती जाती है।"
अब पुजारी ने एक और जोर का थप्पड़ मारा। लड़का बोला, "अब क्या हुआ?"
पुजारी ने कहा, "गधे! यह बात तूने मुझे पहले से क्यों नहीं बताई?"

Tuesday, June 9, 2020

38 त्याग


नगर सेठ, अपने धंधे के अधिकाधिक पल्लवित, पुष्पित और फलित होने के आशीर्वाद की अपेक्षा में एक सच्चे संत के पास आदराॅंजली भेंट करने जा पहुंचे। सेठजी को संत के पूर्व के जीवन का कुछ कुछ पता था कि उन्होंने इतना अधिक पढ़लिख कर क्लास वन सरकारी पोस्ट को ही नहीं संपूर्ण सम्पत्ति को, तिनके की तरह त्याग कर ईश्वरीय मार्ग में कदम रखा और अपने को तपाकर परमसिद्ध अवस्था प्राप्त कर ली है। इसीलिये प्रणाम करते हुए वह बोले,
‘‘भगवन्! आपके त्याग और तपस्या की कीर्ति दिगदिगंत में इस प्रकार फैली है कि मैं आपके दर्शनों की तीब्र जिज्ञासा को रोक ही न सका और श्रीचरणों में आ बैठा, प्रभो! कृपा करें।’’
संत बोले, ‘‘श्रीमन्! मेरा कोई बड़ा त्याग नहीं है। मूल्यहीन इन भौतिक  वस्तुओं के उपभोग को छोड़कर, उस अमूल्य परमसत्ता को पा लेना, क्या बहुत बड़ा त्याग कहला सकता है? अरे! असली त्यागी तो आप हैं जो उस अमूल्य आनन्दघन परमसत्ता को त्याग कर भौतिक जगत की इन नाशवान वस्तुओं में ही प्रसन्न हैं.! ’’

221 चिंजा की शादी

5 वीं क्लास में पढ़ रहीं स्वभाव से सीधी सादी सहुद्रा और भोली सी चिंजा में गहरी दोस्ती थी। चिंजा की स्पष्टवादिता से क्लास के सभी लड़के लड़किय...