गाॅंव के एक सम्पन्न व्यक्ति ने किसी अवसर पर आयोजित भंडारे में सभी प्रतिष्ठत लोगों को आमंत्रित किया। पुजारी जी भी अपने परिवार सहित भोज में पहॅुचे । विभिन्न व्यंजन परोसे गए, सभी लोग प्रसन्नता से भोजन कर रहे थे कि पुजारी ने अपने बड़े लड़के को खाने के बीच बीच में बार बार पानी पीते देख पहले तो इशारे से समझाना चाहा कि इतना पानी क्यों पी रहा है परंतु जब उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा तो उन्होंने उसके गाल पर एक थप्पड़ जोर से लगा दिया।
लड़का बोेला, "क्यों क्या बात है?"
पुजारी बोले, "मूर्ख ! पानी तो रोज पीता है यह व्यंजन रोज नहीं मिलते, यदि पानी ही पीता रहेगा तो इन व्यंजनों के लियेे पेट में जगह ही नहीं रहेगी? इतनी अक्ल नहीं है क्या?"
लड़का बोला, "नहीं बापू ! पानी पीने से खाया गया भोजन नीचे दबता जाता है इसलिये और अधिक व्यंजन खाने के लिये जगह रिक्त होती जाती है।"
अब पुजारी ने एक और जोर का थप्पड़ मारा। लड़का बोला, "अब क्या हुआ?"
पुजारी ने कहा, "गधे! यह बात तूने मुझे पहले से क्यों नहीं बताई?"
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