उस दिन, दिनेश के घर पहुँचे मुझे मुश्किल से पाँच मिनट हुए होंगे कि वहीं खेत में बनी झोपड़ी से किसी महिला के जोर जोर से रोने चिल्लाने की आवाज आई , फिर उसके साथ छोटे बच्चों के रोने चिल्लाने की आवाज भी आने लगी।
मैंने दिनेश से पूछा ‘‘ यह आवाज कैसी?’’
वह बोला, ‘‘अरे! यह तो रोज का धंधा है, अभी सब चुप हो जायेंगे।’’
‘‘बड़ा ही आश्चर्य है, आखिर क्यों?’’
‘‘यह जग्गू पटेल का खेत और झोपड़ी है वह अपनी पत्नी और दो छोटे छोटे बच्चों के साथ वहीं रहता है। खेत में सब्जी भाजी उगाकर जग्गू और उसकी पत्नी परिवार का भरणपोषण करती है। जग्गू रोज दारु पीने के लिये पत्नी से पैसे माँगता है जिसे मना करने पर उसकी इतनी पिटाई होती है कि हाथ पैर सूज जाते हैं, माॅं को रोता देख बच्चे भी रोने लगते हैं, जब जग्गू के हाथ में पैसे आ जाते हैं, वह दारु पीने चला जाता है और तब सब शान्त हो जाते हैं’’
‘‘अजीब नहीं है ये व्यक्ति?’’
‘‘ वास्तव में जग्गू के पिता ने छोटी उम्र में ही उसकी शादी कर, खेत का एक छोटा सा भाग देकर अलग कर दिया था क्योंकि उसकी सौतेली माँ नहीं चाहती थी कि जग्गू उसके साथ रहे। जग्गू का कहना है कि पिता की प्रापर्टी का आधा हिस्सा उसे मिलना चाहिये, पर उसके पिता का कहना है कि जो दे दिया उससे अधिक नहीं मिलेगा, इसी पर आपस में लड़ते रहते हैं और पूरे गुस्से का परिणाम रोज बेचारी पत्नी और बच्चों को अकारण ही भोगना पड़ता है।’’
‘‘ बड़ा ही दुखद है’’
‘‘अरे! यह तो और भी गजब है कि अनेक बार जग्गू की पत्नी के अन्य रिश्तेदारों और पड़ोस की अन्य महिलाओं ने भी, उसे सलाह दी कि जग्गू को छोड़ कर दूसरा घर बसा ले पर वह कहती है कि जब भाग्य में यही लिखा है तो क्या दूसरा और क्या तीसरा? यहाॅं पति के अलावा और कोई आँख उठाकर तो नहीं देख सकता, अपने घर से बाहर निकलने पर तो सब टोंच टोंच कर खाने को ही बैठे हैं? ’’
दिनेश यह सुना ही रहा था कि अचानक सब शाॅंत हो गए, जग्गू पैसे लेकर झोपड़ी से बाहर जाता दिखा, दोनों बच्चे बाहर खेलने लगे और वहीं पर उनकी माँ बर्तन साफ करने लगी।
मैंने उनको पास बुला कर पूछा, ‘‘ तुम्हें मम्मी अच्छी लगती है या पापा?’’
दोनों एक साथ बोले, ‘‘ पापा।’’
दिनेश ने पूछा, ‘‘पापा तो बड़ा ही दुष्ट है वह तुम्हारी मम्मी को रोज पीटता है तुम लोगों को भी पीटता है फिर वह क्यों अच्छा लगता है ?’’
वे बोले, ‘‘ हाॅं ये तो है, पर जैसा भी है, है तो हमारा पापा, हमें तो वही अच्छा लगता है’’ और, वे भाग गये !
हमारी बातें सुनकर जग्गू की पत्नी बोल पड़ी,
‘‘ आत्मसम्मान के साथ सुरक्षित जीवन जीने के लिये भूख प्यास क्या, हर प्रकार के कष्ट सहना मामूली सा लगता है, भैया।’’