Saturday, May 30, 2020

28 त्राहिमाम, पाहिमाम...


एक बार गौतमबुद्ध के कार्यकाल में ही बौद्ध धर्म के अनुयायी दो देशों में अचानक युद्ध छिड़ गया। 
दोनों देशों के सैनिकों की पत्नियाॅं / मातायें/ बहनें क्रमशः भगवान बुद्ध के पास निवेदन करने आने लगे ।
वे सभी कहतीं, 
‘‘हे भगवान! आप तो सब कुछ जानते हो, हम आपके भक्त हैं, केवल आपके ही सहारे हैं, हम पर कृपा करें, युद्ध में हमारे पतियों / पुत्रों / भाइयों की  विजय हो और वे सुरक्षित वापस घर आ जावें।’’ 
गौतम बुद्ध हर बार चुप रहते, वे एक भी शब्द न बोलते। यह देख उनके एक अनुचर से न रहा गया और डरते डरते पॅूंछने लगा,
‘‘ भगवन् ! आपके अनुयायी देशों की ये महिलाएं बड़ी आशा से आपके पास निवेदन करने आती हैं और आप उन्हें कुछ भी नहीं कहते ?’’
‘‘ वे अन्यायी हैं, हमारे अनुयायी होते तो युद्ध नहीं करते । ’’ बुद्ध ने धिक्कारते हुए कहा।

Friday, May 29, 2020

27. सब से बड़ा झूठ


कॅन्टोन्मेंट पार्क में मॉल रोड गेट से एक महिला आई और  पेड़ के नीचे डली पत्थर की बेंच के एक कोने पर बैठ गई। 
पांच मिनट बाद दूसरे गेट से अन्य महिला आकर उसी बेंच के दूसरे कोने पर बैठ गई।  
एक घंटे बाद दोनों अलग अलग गेटों से चली गईं।  

26. असत्यनारायण

 कथा चल रही है----- 
    "इसप्रकार भगवान सत्यनारायण की कृपा से लीलावती और कलावती अपने अपने पति के साथ चन्द्र लोक को प्राप्त भईं। इतिश्री रे ... "
  बीच में  ही लल्लू बोला, "पंडज्जी! हमने विज्ञान में पढ़ा है कि चन्द्रमा पर न तो पानी है न हवा और न ही जीवन , केवल गड्डे ही हैं फिर --- "
 "चुप! बड़ा आया विज्ञान वाला, तेरे बाप ने पढ़ा है कभी?--- न पानी -- न हवा---  "

Thursday, May 28, 2020

25 बीएड कालेज


पिछले सत्र में मेरे एक परिचित ने अपनी पुत्री को एम ए करने के बाद बीएड कराने का निश्चय  किया। उच्च शिक्षा विभाग  के विज्ञापन जारी होने के लत्काल बाद उन्होंने नियमानुसार ओन लाइन रजिस्ट्रेशन कराने और आवेदन शुल्क के पाॅंच हजार रुपये जमा कर दिये। कुछ दिनों बाद सूचना प्राप्त हुई कि नोडल कालेज जो कि स्थानीय सरकारी कालेज था, में अपने मूल सर्टीफिकेट दिखाइये और बीस हजार रुपये का बैंक ड्राफ्ट ‘अमुक‘ बीएड कालेज के नाम जमा कीजिये साथ ही वाॅंछनीय दस्तवेजों के दो सेट फोटो कापी करा कर जमा कराइये। 
वे अपनी पुत्री के साथ नोडल कालेज जाकर सत्यापन और ड्राफ्ट संबंधी कार्यावाही कर आये और निर्देशानुसार आवंटित कालेज के प्राचार्य से एडमीशन करने और अन्य जानकारी लेने उनसे मिले। उन्होंने तत्काल पाॅंच सौ रुपये एडमीशन फार्म , जिसमे कुल तीन पन्ने थे, दिये और चाही गई जानकारी भरकर  पाॅंच फोटो  और सभी जांच कराये गये दस्तावेजों का एक सैट सहित जमा करने के लिये कहा। अगले दिन वे फार्म और फोटो लेकर जमा करने फिर पहुंचे, वहाॅं इसी प्रकार के प्रवेश  पाने वाले छात्र छात्रायें जो प्रायः दूसरे जिलों से आये थे भीड़ में अपने अपने कार्य कराने की होड़ में लगे थे।
शासन के निर्देशानुसार बीएड कक्षायें 25 अप्रेल से चालू की जाना थीं अतः मेरे परिचित ने प्राचार्य से पूछा कि टाइमटेबिल क्या रहेगा?  वे बोले काहे का टाइम टेबिल? परिचित ने कहा कि  निर्देशों  में लिखा है कि 25
अप्रेल से कक्षाये प्रारंभ हो जावेंगी और जुलाई से प्रेक्टिस टीचिंग होगी। प्राचार्य दबी मुस्कुराहट में बोले वो तो सब लिखा रहता है पर गर्मी में कौन आता है पढ़ने, आप तो जाओ बिटिया को जुलाई में ही भेजना।  परिचित बोले ठीक है पर प्रास्पेक्टस के अनुसार पाठ्य पुस्तके तो कालेज की लाइब्रेरी  से मिलेंगीं ? यदि हाॅं तो दिला दीजिये ताकि वह अपनी प्रारंभिक तैयारी इन छुट्टियों में करती रहे। वे बोले काहे की टेक्स्ट बुक्स ? सभी लोग नोटबुक्स से पढ़ते हैं और उन्हीं में से पूछा जाता है जाओ ‘एक्स‘ दूकान से खरीदना, मेरा बता देना, वह कुछ कंसेशन भी कर देगा। जुलाई में जब वह फिर कालेज पहुॅंचे तो सन्नाटा था। एक चपरासी और एक बाबू ,जो अपने को लाइब्रेरियन कहता था, मिला । उसने कहा अभी प्राचार्य तो नहीं आये पता नहीं आते भी हैं कि नहीं, पर कक्षाओं के चक्कर में मत रहो, तुम तो अपना काम करो, अगले माह में आना तो प्रेक्टिस टीचिंग को  पास की सरकारी स्कूल में करा देंगे और न आ सको तो प्राचार्य से मिल लेना वे सब कुछ करा देंगे। 
मेरे परिचित बड़े आश्चर्य  में थे कि यह कैसा प्रशिक्षण, पर क्या था ? बापस आये, और चुप हो गये, शायद  वे अपने जमाने के प्रशिक्षण की कल्पना कर रहे थे जब बीएड कालेज के  प्रशिक्षणार्थी एक मिनट की फुर्सत नहीं पाते थे। बीच बीच में वे संपर्क करते रहे पर जबाब यही मिलता कि चिंता नहीं करो सब ठीक हो जायेगा। आस पास के अन्य प्राइवेट बीएड कालेजों में भी जानकारी ली पर वहाॅं भी यही हाल पाया। इस प्रकार होते होते दिसंबर आया और परीक्षा के फार्म भरने की सूचना प्रकाशित हुई। बताया गया कि परीक्षा फीस के दो हजार, हाजिरी के दस हजार, प्रेक्टिस टीचिंग के  पाॅंच हजार, फाइल और सेसनल वर्क के पाॅंच हजार , कुल बाइस हजार रुपये जमा करो तभी परीक्षा फार्म जमा होगा । जब उन्होंने तर्क दिया कि विभाग ने पहले तो कहा था कि बीस हजार के ड्राफ्ट  के बाद और कोई फीस नहीं लगेगी? और हाजिरी के लिये बार बार कक्षाओं के बारे में पूछे जाने पर कहा गया कि चिंता नहीं करो?
प्राचार्य ने कहा कि यही होता है कहीं पर कोई कक्षायें नहीं चलती , यह तो सब नियमों की बाते हैं , किसको फुर्सत है जो कक्षाओं में आये और किसे पढ़ना पढ़ाना है? आप तो वही करो जैसा सब कर रहे हैं , जो राशि  आपको बतायी गयी है वह कन्सेशनल  रेट हैं,  अभी देखना वे सामने आ रहे लड़के कितनी फीस जमा करते हैं। देखा कि तीन लड़के जिनके हाव भाव और प्रदर्शन से कहीं भी शिक्षित होने या शिक्षक  होने का आभास नहीं होता था , आये और तीस तीस हजार रुपये जमा कर अपना अपना परीक्षा फार्म जमा कर गये। जाते जाते एक ने पूछा सर! अब कब मिलें? प्राचार्य बोले परीक्षा प्रारंभ होने के बस दो दिन पहले, सब व्यवस्था हो जावेगी। तात्पर्य यह कि पेपरों में क्या क्या पूछा जाना है , बता देंगे। प्राचार्य ने मेरे परिचित की ओर जिज्ञासा भरी द्रष्टि से देखा जैसे पूछ रहे हों कि उन्होंने दूसरों से कम फीस ही उनसे चाही है, या नहीं।

Wednesday, May 27, 2020

24 ठग


रामगोपाल के घर की तीन दिन से निगरानी कर रहे दो ठगों को जब कोई रास्ता न मिला तो उन्होंने रामगोपाल की पत्नी को दिन में ही ठगने की योजना बनाई। उन्होंने देखा कि रामगोपाल रोज दिन में कुए पर नहाने और बैलों को पानी पिलाने जाता है जिसमें दो घंटे लगते हैं, इस समय घर पर पत्नी के अलावा कोई नहीं होता अतः इसी बीच घर की सफाई कर दी जाये।
योजना के अनुसार घर पर जाकर खटखटाने लगे। रामगोपाल की पत्नी ने पूछा - ‘‘को है? घर पे कोउ नईंयाॅं , कुआ पे मिल हें।’’
बाहर से आवाज आई, ‘‘अरे जिज्जी ! हम सेमरा सें आये हैं। ’’
‘‘सेमरा सें? अच्छा ! रामशरण भैया के गाॅंव सें?’’
और ‘हाॅं’ सुनते ही  हुए दरवाजा खोल दिया।
दोनों ठगों ने वाकायदा पैर छुए, आशीष मिला और बातें शुरु हुई...
‘‘तो, रामशरण भैया, मौसा, मौसी सब लोग कैसे हैं ? तुम का ओ बकोली बारों के लरका आव ?’’
‘‘ हाॅं जिज्जी! तुमने चीनइं लव ।’’
‘‘और जे भैया?’’
‘‘अरे  ..  जे ? नईं चीन पाईं ? रामशरण के बगल बारी नन्नी काकी के लरका। ’’
‘‘अच्छा.... ! कित्ते साल तोे हो गये , कब सें सेमरा नहीं गये। भैया! जा घर गिरस्ती कहूँ नईं जान देत। अच्छा बैठो हम अब्बई आये।’’
 इस बीच ठग अपनी योजना आगे बढ़ाते कि वह पानी, मिठाई, फल फूल और अन्य नाश्ते का सामान लाई और कहा,
‘‘लो पानी पियो, कित्ती दूर से भर दुपरिया में चले आ रये हो, नाश्ता करो, तुमाय जीजा, बस आऊतइ हुइंयें। जब तक हम खाना तैयार कर लेवें, सब जनें एक संगे खाइयो। ’’
ठग बार बार अपनी योजना के अनुसार बात आगे बढ़ाने की कोशिश करते कि रामगोपाल की पत्नी कोई न कोई नई बात अपनी ओर से पूछ लेती और खाना भी बनाती जाती । उनकी खातिरदारी भी करती जाती, उनके लाख मना करने पर भी नहीं मानती और कहती, ‘‘ अरे! जिज्जी के घरे आये हो कौनऊं और के ना तो नहीं, इत्तो तो खानेइ पर है ।’’
इतने में बैलों सहित रामगोपाल आ गये, ठग बड़े परेशान, अब क्या करें?
आवाज सुनकर वह बाहर आई और रामगोपाल को बताया कि ये लोग रामशरण भैया के दोस्त हैं अभी अभी सेमरा से आये हैं । रामगोपाल ने भी उन्हें उचित सम्मान देकर भोजन करने के लिये  अपने साथ बिठाया और लगे रिश्तेदारों की बाते पूछने और बताने। बातें इतनी कि एक पूरी न हो पाये और दूसरी शुरु। 
ठगों की स्थिति तो सांप छछूंदर जैसी हो गई न निगलते बनाता और न उगलते।

Sunday, May 24, 2020

23 नेता उवाच


ठाकुरों की सभा में नेता जी बोले, ‘‘उठो महाराणा प्रताप के बंशजो! आज तुम्हारी आन, बान और शान को इन लुटेरों ने ललकारा है। इन्हें हम दिखा देंगे कि इनकी औकात क्या है। राजपूतों को हम उसका गौरव दिला कर ही चैन लेंगे.......’’
अब वे ब्राह्मण बहुल क्षेत्र में पहुँचे,
‘‘ ब्राह्मणों ने ही सबको ज्ञान बाॅंटकर उन्नत बनाया है, वे सबके पूजनीय हैं, वे हमारे गुरु हैं, पथप्रदर्शक  हैं, वे सब को बाॅंटते ही रहे हैं पर किसी से चाहा कुछ नहीं है, हम उन्हें उनका शीर्ष  स्थान दिलाकर ही मानेंगे....’’
किसानों की सभा में  जा कर दहाड़े ‘‘किसान सबके अन्नदाता हैं, उनकी जरूरतों को पूरा कौन करेगा? उन्हें बीज, खाद, विजली, पानी और संरक्षण कौन देगा? हम देंगे। खेती को लाभदायी उत्पादों और उद्योग से कौन जोड़गा? हम जोड़ेंगे।’’
 और मजदूरों के बीच बोले, ‘‘मजदूर यदि न हो तो ये अट्टालिकाएं कौन बनायेगा? रोड कौन बनायेगा? रेल की पटरी कौन विछायेगा? फेक्टरियों में कौन काम करेगा? सबको पल पल सहायता देने के लिये हमारे यही भाई काम आते हैं और इनकी जरूरतों के लिये कोई चिंता नहीं करता, हम इन्हें इनका हक दिलायेंगे, उनके परिश्रम का उन्हें उचित मूल्य हम दिलायेंगे....’’
राजनीति का ‘क ख ग’ सीखने मैं नेता जी के साथ हर सभा में उनके साथ ही रहा करता, मैंने पूछा, ‘‘ आप जाति या काम के अनुसार हर क्षेत्र में उनके ही हित की बात करते हैं, पर क्या सभी को अपने कहे अनुसार कुछ कर पाएंगे?’’ वे बोले,
‘‘बेटा ! मनोविज्ञान के इन तथ्यों को अच्छी तरह समझ लो कि इस प्रकार के ज्योसेंटीमेंटस, सोसियो सेंटीमेंटस, और ज्योसोसियो सेंटीमेंटस भड़का कर बोट कैसे लिये जाते हैं; समाज के हर वर्ग का दोहन कर किस प्रकार किया जाता है......।’’
‘‘ देश की जनता क्या इतनी भोली है ......?’’ मैं सोचता रहा, सोचता रहा।

22 आठ आना का न्याय


 दीना और राजू शहर से जरूरी चीजें खरीदने जाने लगे तो दीना की माॅं ने पाॅंच लड्डू और राजू की माॅं ने तीन लड्डू साथ में रख दिये और कहा कि रास्ते के बीच में नदी पर नाश्ता  कर लेना।
नदी पर दोनों नाश्ता  करने बैठे ही थे कि सामने से राजू के चाचा आते दिखे, दोनों ने उन्हें नाश्ता  के लिये पास बुला लिया, तीनों ने बिलकुल बराबर बराबर नाश्ता  किया और जब चलने लगे तो राजू के चाचा ने आठ आना दिये और कहा कि तुम दोनों बाॅंट लेना ।
थोड़ी दूर आगे बढ़े ही थे कि राजू ने दीना को चार आना दे दिये। दीना बोला एक आना और दो , हमारे पाॅंच आना और तुम्हारे तीन आना हुए लड्डुओं की संख्या के अनुसार। राजू ने कहा चाचा ने तो बराबर बाॅंटने को कहा था। पर दीना नहीं माना और एक आना और लेने के लिये झगड़ पड़ा।
जब झगड़े से बात नहीं बनी तो दोनों इस बात पर सहमत हुए कि गुरुजी के पास चलते हैं वे जो फैसला करेंगे वह मान लेंगे। लौट कर दोनों गुरुजी के पास पहुंचे , अपनी समस्या बतायी।

गुरुजी ने दीना को सात आना और राजू को एक आना दिया और कहा अब आगे नहीं झगड़ना।
गुरुजी का न्याय ........?

21 अनोखी सूझ


उस दिन, दिनेश  के घर पहुँचे मुझे मुश्किल  से पाँच मिनट हुए होंगे कि वहीं खेत में बनी झोपड़ी से किसी महिला के जोर जोर से रोने चिल्लाने की आवाज आई , फिर उसके साथ छोटे बच्चों के रोने चिल्लाने की आवाज भी आने लगी। 
मैंने दिनेश  से पूछा ‘‘ यह आवाज कैसी?’’
वह बोला, ‘‘अरे! यह तो रोज का धंधा है, अभी सब चुप हो जायेंगे।’’
‘‘बड़ा ही आश्चर्य  है, आखिर क्यों?’’ 
‘‘यह जग्गू पटेल का खेत और झोपड़ी है वह अपनी पत्नी और दो छोटे छोटे बच्चों के साथ वहीं रहता है। खेत में सब्जी भाजी उगाकर जग्गू और उसकी पत्नी परिवार का भरणपोषण करती है। जग्गू रोज दारु पीने के लिये पत्नी से पैसे माँगता है जिसे मना करने पर उसकी इतनी पिटाई होती है कि हाथ पैर सूज जाते हैं, माॅं  को रोता देख बच्चे भी रोने लगते हैं, जब जग्गू के हाथ में पैसे आ जाते हैं, वह दारु पीने चला जाता है और तब सब शान्त  हो जाते हैं’’ 
‘‘अजीब नहीं है ये व्यक्ति?’’
‘‘ वास्तव में जग्गू के पिता ने छोटी उम्र में ही उसकी शादी कर, खेत का एक छोटा सा भाग देकर अलग कर दिया था क्योंकि उसकी सौतेली माँ नहीं चाहती थी कि जग्गू उसके साथ रहे। जग्गू का कहना है कि पिता की प्रापर्टी का आधा हिस्सा उसे मिलना चाहिये, पर उसके पिता का कहना है कि जो दे दिया उससे अधिक नहीं मिलेगा, इसी पर आपस में लड़ते रहते हैं और पूरे गुस्से का परिणाम रोज बेचारी पत्नी और बच्चों को अकारण ही भोगना पड़ता है।’’
‘‘ बड़ा ही दुखद है’’ 
‘‘अरे! यह तो और भी गजब है कि अनेक बार जग्गू की पत्नी के अन्य रिश्तेदारों  और पड़ोस की अन्य महिलाओं ने भी, उसे सलाह दी कि जग्गू को छोड़ कर दूसरा घर बसा ले पर वह कहती है कि जब भाग्य में यही लिखा है तो क्या दूसरा और क्या तीसरा? यहाॅं पति के अलावा और कोई आँख  उठाकर तो नहीं देख सकता, अपने घर से बाहर निकलने पर तो सब टोंच टोंच  कर खाने को ही बैठे हैं? ’’
दिनेश यह सुना ही रहा था कि अचानक सब शाॅंत हो गए, जग्गू पैसे लेकर झोपड़ी से बाहर जाता दिखा, दोनों बच्चे बाहर खेलने लगे और वहीं पर उनकी माँ बर्तन साफ करने लगी। 
 मैंने उनको पास बुला कर पूछा, ‘‘ तुम्हें मम्मी अच्छी लगती है या पापा?’’
दोनों  एक साथ बोले, ‘‘ पापा।’’
 दिनेश  ने पूछा, ‘‘पापा तो बड़ा ही दुष्ट है वह तुम्हारी मम्मी को रोज पीटता है तुम लोगों को भी पीटता है फिर वह क्यों अच्छा लगता है ?’’
वे बोले, ‘‘ हाॅं ये तो है, पर जैसा भी है, है तो हमारा पापा, हमें तो वही अच्छा लगता है’’ और, वे भाग गये !
हमारी बातें सुनकर जग्गू की पत्नी बोल पड़ी,
‘‘ आत्मसम्मान के साथ सुरक्षित जीवन जीने के लिये भूख प्यास क्या, हर प्रकार के कष्ट सहना मामूली सा लगता है, भैया।’’ 

221 चिंजा की शादी

5 वीं क्लास में पढ़ रहीं स्वभाव से सीधी सादी सहुद्रा और भोली सी चिंजा में गहरी दोस्ती थी। चिंजा की स्पष्टवादिता से क्लास के सभी लड़के लड़किय...