एक बार गौतमबुद्ध के कार्यकाल में ही बौद्ध धर्म के अनुयायी दो देशों में अचानक युद्ध छिड़ गया।
दोनों देशों के सैनिकों की पत्नियाॅं / मातायें/ बहनें क्रमशः भगवान बुद्ध के पास निवेदन करने आने लगे ।
वे सभी कहतीं,
‘‘हे भगवान! आप तो सब कुछ जानते हो, हम आपके भक्त हैं, केवल आपके ही सहारे हैं, हम पर कृपा करें, युद्ध में हमारे पतियों / पुत्रों / भाइयों की विजय हो और वे सुरक्षित वापस घर आ जावें।’’
गौतम बुद्ध हर बार चुप रहते, वे एक भी शब्द न बोलते। यह देख उनके एक अनुचर से न रहा गया और डरते डरते पॅूंछने लगा,
‘‘ भगवन् ! आपके अनुयायी देशों की ये महिलाएं बड़ी आशा से आपके पास निवेदन करने आती हैं और आप उन्हें कुछ भी नहीं कहते ?’’
‘‘ वे अन्यायी हैं, हमारे अनुयायी होते तो युद्ध नहीं करते । ’’ बुद्ध ने धिक्कारते हुए कहा।
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