‘‘नमस्कार सर! क्या मैं आपसे पाॅंच मिनट चर्चा कर सकता हॅूं?‘‘
- ‘‘क्यो‘‘?
- ‘मैं एक रिसर्चस्कालर हॅूं और वर्तमान शिक्षा की दुर्दशा पर अध्ययन कर रहा हॅू।‘
-‘ बोलो क्या कहना चाहते हो?‘
- ‘‘सर! आप तो अपने जमाने के प्रभावी और प्रतिष्ठित अध्यापक रहे हैं, क्या बता सकते हैं कि वर्तमान में शिक्षा की दुर्दशा के लिये इनमें से उत्तरदायी कौन है, ‘‘शिक्षा व्यवस्था,‘‘ ‘‘शिक्षक,‘‘ ‘‘विद्यार्थी‘‘ या ‘‘सरकार‘‘?‘‘
- ‘‘भाई साहब! शायद आपको यह ज्ञात हो कि हमारे जमाने में शिक्षक को ‘पेन‘ ‘‘pen ’’ और ‘केन’ ‘‘cane ’’ द्वारा ही पहचाना जाता था। अब यह दोनों ही नहीं हैं तो शिक्षा की दुर्दशा तो होगी ही।‘‘
- ‘‘सर ! थोड़ा और स्पष्ट करें ?‘‘
- ‘‘अरे! सीधी सी बात है,‘केन‘ (अर्थात् अनुशासन) सरकार ने छुड़ा लिया और ‘पेन‘ (अर्थात् ज्ञान) शिक्षक ने स्वयं छोड़ दिया, बस, यही है तुम्हारी थीसिस का सार, जाओ लिख डालो, सर्वे में व्यर्थ क्यों भटकते हो?‘‘