हम लोग जब बीएससी में थे, वह समय अँग्रेजीमय था। मुख्य विषयों की तो हिन्दी में किताबें ही नहीं मिलती थीं । अनिवार्य विषय हिन्दी को भी प्रोफेसर गण अँग्रेजी में ही समझाते थे। एक बार हिंदी विभाग की किसी संगोष्ठी में अचानक हमारा समूह यों ही पीछे की ओर श्रोताओं में जा घुसा। एक विद्वान ने अपना पूरा व्याख्यान विशुद्ध हिन्दी में दिया और बहुत वाहवाही लूटी। हम लोगों को भी यह देख कर शुद्ध हिंदी में पारस्परिक संभाषण करने का विचार आया। इसी धुन में एक दिन बाजार में एक सिंधीभाषी के जनरल स्टोर में जाकर हम में से एक ने कहा ‘श्रेष्ठ केश तेल देना‘ कुछ क्षण सोचकर उसने तेल वाले सेल्फ पर एक नजर दौड़ाई और कहा ‘ नहीं कोई श्रेष्ठ केश तेल नहीं है‘ । इतने में दूसरे ने कहा ‘अच्छा तो निकृष्ट केश तेल दे दो?’ फिर दूकानदार ने वही, कुछ क्षण रुक कर और सेल्फ की ओर देखकर कहा ‘नहीं निकृष्ट केश तेल भी नहीं है।‘
मैंने तेल वाले सेल्फ पर रखी पेक बंद तेल की शीशीयों की ओर इशारा कर पूंछा ‘ये सब क्या हैं?’
वह बोला, ‘ ये चंदन, ये चमेली, ये ऑवला, ये नारियल, ये कड़ुआ।‘
मित्र ने कहा ‘अच्छा तो आवला केश तेल ही दे दो‘।
जब हम लोगों ने उसे श्रेष्ठ और निकृष्ट का अर्थ बताया तो वह बोला,‘‘ भाई साहब हमारे लिये तो श्रेष्ठ और निकृष्ट एक समान हैं वह तो खरीददारों पर निर्भर होता है कि वे किसे श्रेष्ठ मानते हैं किसे निकृष्ट, किसी को चंदन श्रेष्ठ लगता है किसी को कड़ुआ‘‘।
वहीं खड़े, हमारा वार्तालाप सुन एक सज्जन बोले,
‘‘ किसी की श्रेष्ठता अथवा निकृष्टता इस बात पर निर्भर करती है मूल्याॅंकनकर्ता का मापक (scale of measurement) मापन हेतु चयनित प्रारंभिक विंदु (origin of measuring point) क्या है। यदि ये दोनों स्थिर हैं तो सभी माप एकसमान होंगे यदि इनमें से एक भी बदल गया तो सभी माप भिन्न भिन्न हो जाते हैं। ’’
चुपचाप खिसक लेने का इशारा करते हुए एक मित्र बोला,
‘‘ चलो , यह तो गणित का शिक्षक लगता है।’’