Saturday, September 5, 2020

67 चाणक्य


"कौटिल्य"  अर्थात  चाणक्य से मिलने आये एक विद्वान ने उनसे पूछा .

"आपके कितने बँधु  बांधव हैं और वे कहाँ रहते  हैं?"

चाणक्य बोले," छह बंधु बांधव हैं और वे मेरे साथ ही रहते हैं। "

विद्वान ने फिर कहा ," यहाँ तो  छह हाथ लम्बी और छह हाथ चौड़ी झोपड़ी ही दिखाई दे रही है वे सब कहाँ है ?

 परिचय  तो कराओ ?"

चाणक्य बोले ,

"सत्यम  माता पिता ज्ञानं बुद्धिर्भ्राता  दया सखा 

शांतिः पत्नी क्षमा पुत्रो षष्ठेते मम बान्धवा। "


अर्थात सत्य मेरी माता हैं, पिता ज्ञान हैं, बुद्धि भाई और दया सखा हैं,  शांति पत्नी और क्षमा पुत्र है,  यही मेरे छह बांधव हैं।  


विद्वान महोदय ,  साधो! साधो! साधो! कहते अश्रुपात करते रहे।  


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