दीना और राजू शहर से जरूरी चीजें खरीदने जाने लगे तो दीना की माॅं ने पाॅंच लड्डू और राजू की माॅं ने तीन लड्डू साथ में रख दिये और कहा कि रास्ते के बीच में नदी पर नाश्ता कर लेना।
नदी पर दोनों नाश्ता करने बैठे ही थे कि सामने से राजू के चाचा आते दिखे, दोनों ने उन्हें नाश्ता के लिये पास बुला लिया, तीनों ने बिलकुल बराबर बराबर नाश्ता किया और जब चलने लगे तो राजू के चाचा ने आठ आना दिये और कहा कि तुम दोनों बाॅंट लेना ।
थोड़ी दूर आगे बढ़े ही थे कि राजू ने दीना को चार आना दे दिये। दीना बोला एक आना और दो , हमारे पाॅंच आना और तुम्हारे तीन आना हुए लड्डुओं की संख्या के अनुसार। राजू ने कहा चाचा ने तो बराबर बाॅंटने को कहा था। पर दीना नहीं माना और एक आना और लेने के लिये झगड़ पड़ा।
जब झगड़े से बात नहीं बनी तो दोनों इस बात पर सहमत हुए कि गुरुजी के पास चलते हैं वे जो फैसला करेंगे वह मान लेंगे। लौट कर दोनों गुरुजी के पास पहुंचे , अपनी समस्या बतायी।
गुरुजी ने दीना को सात आना और राजू को एक आना दिया और कहा अब आगे नहीं झगड़ना।
गुरुजी का न्याय ........?
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