Thursday, May 28, 2020

25 बीएड कालेज


पिछले सत्र में मेरे एक परिचित ने अपनी पुत्री को एम ए करने के बाद बीएड कराने का निश्चय  किया। उच्च शिक्षा विभाग  के विज्ञापन जारी होने के लत्काल बाद उन्होंने नियमानुसार ओन लाइन रजिस्ट्रेशन कराने और आवेदन शुल्क के पाॅंच हजार रुपये जमा कर दिये। कुछ दिनों बाद सूचना प्राप्त हुई कि नोडल कालेज जो कि स्थानीय सरकारी कालेज था, में अपने मूल सर्टीफिकेट दिखाइये और बीस हजार रुपये का बैंक ड्राफ्ट ‘अमुक‘ बीएड कालेज के नाम जमा कीजिये साथ ही वाॅंछनीय दस्तवेजों के दो सेट फोटो कापी करा कर जमा कराइये। 
वे अपनी पुत्री के साथ नोडल कालेज जाकर सत्यापन और ड्राफ्ट संबंधी कार्यावाही कर आये और निर्देशानुसार आवंटित कालेज के प्राचार्य से एडमीशन करने और अन्य जानकारी लेने उनसे मिले। उन्होंने तत्काल पाॅंच सौ रुपये एडमीशन फार्म , जिसमे कुल तीन पन्ने थे, दिये और चाही गई जानकारी भरकर  पाॅंच फोटो  और सभी जांच कराये गये दस्तावेजों का एक सैट सहित जमा करने के लिये कहा। अगले दिन वे फार्म और फोटो लेकर जमा करने फिर पहुंचे, वहाॅं इसी प्रकार के प्रवेश  पाने वाले छात्र छात्रायें जो प्रायः दूसरे जिलों से आये थे भीड़ में अपने अपने कार्य कराने की होड़ में लगे थे।
शासन के निर्देशानुसार बीएड कक्षायें 25 अप्रेल से चालू की जाना थीं अतः मेरे परिचित ने प्राचार्य से पूछा कि टाइमटेबिल क्या रहेगा?  वे बोले काहे का टाइम टेबिल? परिचित ने कहा कि  निर्देशों  में लिखा है कि 25
अप्रेल से कक्षाये प्रारंभ हो जावेंगी और जुलाई से प्रेक्टिस टीचिंग होगी। प्राचार्य दबी मुस्कुराहट में बोले वो तो सब लिखा रहता है पर गर्मी में कौन आता है पढ़ने, आप तो जाओ बिटिया को जुलाई में ही भेजना।  परिचित बोले ठीक है पर प्रास्पेक्टस के अनुसार पाठ्य पुस्तके तो कालेज की लाइब्रेरी  से मिलेंगीं ? यदि हाॅं तो दिला दीजिये ताकि वह अपनी प्रारंभिक तैयारी इन छुट्टियों में करती रहे। वे बोले काहे की टेक्स्ट बुक्स ? सभी लोग नोटबुक्स से पढ़ते हैं और उन्हीं में से पूछा जाता है जाओ ‘एक्स‘ दूकान से खरीदना, मेरा बता देना, वह कुछ कंसेशन भी कर देगा। जुलाई में जब वह फिर कालेज पहुॅंचे तो सन्नाटा था। एक चपरासी और एक बाबू ,जो अपने को लाइब्रेरियन कहता था, मिला । उसने कहा अभी प्राचार्य तो नहीं आये पता नहीं आते भी हैं कि नहीं, पर कक्षाओं के चक्कर में मत रहो, तुम तो अपना काम करो, अगले माह में आना तो प्रेक्टिस टीचिंग को  पास की सरकारी स्कूल में करा देंगे और न आ सको तो प्राचार्य से मिल लेना वे सब कुछ करा देंगे। 
मेरे परिचित बड़े आश्चर्य  में थे कि यह कैसा प्रशिक्षण, पर क्या था ? बापस आये, और चुप हो गये, शायद  वे अपने जमाने के प्रशिक्षण की कल्पना कर रहे थे जब बीएड कालेज के  प्रशिक्षणार्थी एक मिनट की फुर्सत नहीं पाते थे। बीच बीच में वे संपर्क करते रहे पर जबाब यही मिलता कि चिंता नहीं करो सब ठीक हो जायेगा। आस पास के अन्य प्राइवेट बीएड कालेजों में भी जानकारी ली पर वहाॅं भी यही हाल पाया। इस प्रकार होते होते दिसंबर आया और परीक्षा के फार्म भरने की सूचना प्रकाशित हुई। बताया गया कि परीक्षा फीस के दो हजार, हाजिरी के दस हजार, प्रेक्टिस टीचिंग के  पाॅंच हजार, फाइल और सेसनल वर्क के पाॅंच हजार , कुल बाइस हजार रुपये जमा करो तभी परीक्षा फार्म जमा होगा । जब उन्होंने तर्क दिया कि विभाग ने पहले तो कहा था कि बीस हजार के ड्राफ्ट  के बाद और कोई फीस नहीं लगेगी? और हाजिरी के लिये बार बार कक्षाओं के बारे में पूछे जाने पर कहा गया कि चिंता नहीं करो?
प्राचार्य ने कहा कि यही होता है कहीं पर कोई कक्षायें नहीं चलती , यह तो सब नियमों की बाते हैं , किसको फुर्सत है जो कक्षाओं में आये और किसे पढ़ना पढ़ाना है? आप तो वही करो जैसा सब कर रहे हैं , जो राशि  आपको बतायी गयी है वह कन्सेशनल  रेट हैं,  अभी देखना वे सामने आ रहे लड़के कितनी फीस जमा करते हैं। देखा कि तीन लड़के जिनके हाव भाव और प्रदर्शन से कहीं भी शिक्षित होने या शिक्षक  होने का आभास नहीं होता था , आये और तीस तीस हजार रुपये जमा कर अपना अपना परीक्षा फार्म जमा कर गये। जाते जाते एक ने पूछा सर! अब कब मिलें? प्राचार्य बोले परीक्षा प्रारंभ होने के बस दो दिन पहले, सब व्यवस्था हो जावेगी। तात्पर्य यह कि पेपरों में क्या क्या पूछा जाना है , बता देंगे। प्राचार्य ने मेरे परिचित की ओर जिज्ञासा भरी द्रष्टि से देखा जैसे पूछ रहे हों कि उन्होंने दूसरों से कम फीस ही उनसे चाही है, या नहीं।

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