रामगोपाल के घर की तीन दिन से निगरानी कर रहे दो ठगों को जब कोई रास्ता न मिला तो उन्होंने रामगोपाल की पत्नी को दिन में ही ठगने की योजना बनाई। उन्होंने देखा कि रामगोपाल रोज दिन में कुए पर नहाने और बैलों को पानी पिलाने जाता है जिसमें दो घंटे लगते हैं, इस समय घर पर पत्नी के अलावा कोई नहीं होता अतः इसी बीच घर की सफाई कर दी जाये।
योजना के अनुसार घर पर जाकर खटखटाने लगे। रामगोपाल की पत्नी ने पूछा - ‘‘को है? घर पे कोउ नईंयाॅं , कुआ पे मिल हें।’’
बाहर से आवाज आई, ‘‘अरे जिज्जी ! हम सेमरा सें आये हैं। ’’
‘‘सेमरा सें? अच्छा ! रामशरण भैया के गाॅंव सें?’’
और ‘हाॅं’ सुनते ही हुए दरवाजा खोल दिया।
दोनों ठगों ने वाकायदा पैर छुए, आशीष मिला और बातें शुरु हुई...
‘‘तो, रामशरण भैया, मौसा, मौसी सब लोग कैसे हैं ? तुम का ओ बकोली बारों के लरका आव ?’’
‘‘ हाॅं जिज्जी! तुमने चीनइं लव ।’’
‘‘और जे भैया?’’
‘‘अरे .. जे ? नईं चीन पाईं ? रामशरण के बगल बारी नन्नी काकी के लरका। ’’
‘‘अच्छा.... ! कित्ते साल तोे हो गये , कब सें सेमरा नहीं गये। भैया! जा घर गिरस्ती कहूँ नईं जान देत। अच्छा बैठो हम अब्बई आये।’’
इस बीच ठग अपनी योजना आगे बढ़ाते कि वह पानी, मिठाई, फल फूल और अन्य नाश्ते का सामान लाई और कहा,
‘‘लो पानी पियो, कित्ती दूर से भर दुपरिया में चले आ रये हो, नाश्ता करो, तुमाय जीजा, बस आऊतइ हुइंयें। जब तक हम खाना तैयार कर लेवें, सब जनें एक संगे खाइयो। ’’
ठग बार बार अपनी योजना के अनुसार बात आगे बढ़ाने की कोशिश करते कि रामगोपाल की पत्नी कोई न कोई नई बात अपनी ओर से पूछ लेती और खाना भी बनाती जाती । उनकी खातिरदारी भी करती जाती, उनके लाख मना करने पर भी नहीं मानती और कहती, ‘‘ अरे! जिज्जी के घरे आये हो कौनऊं और के ना तो नहीं, इत्तो तो खानेइ पर है ।’’
इतने में बैलों सहित रामगोपाल आ गये, ठग बड़े परेशान, अब क्या करें?
आवाज सुनकर वह बाहर आई और रामगोपाल को बताया कि ये लोग रामशरण भैया के दोस्त हैं अभी अभी सेमरा से आये हैं । रामगोपाल ने भी उन्हें उचित सम्मान देकर भोजन करने के लिये अपने साथ बिठाया और लगे रिश्तेदारों की बाते पूछने और बताने। बातें इतनी कि एक पूरी न हो पाये और दूसरी शुरु।
ठगों की स्थिति तो सांप छछूंदर जैसी हो गई न निगलते बनाता और न उगलते।
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