Tuesday, June 16, 2020

42आभूषण प्रियता


किसी बात पर बंगाली दम्पति इतने झगड़े कि पत्नी, डूबकर जान देने की धमकी देती हुई, गहनों का वाक्स लेकर तालाब की ओर दौड़ पड़ी। पीछे पीछे पति महाशय भी चल दिये। पत्नी, खूब गहरे पानी की ओर न जाकर उस ओर गई जहाॅं पानी केवल पिडुलियों तक डूबने का था। पानी में जाकर अपने गहनों का बाक्स बगल में दबाये चिल्लाने लगी...
‘‘ले देख ले! अब, बस डूब ही जाऊंगी!... अब तो डूब ही मरूंगी ! देखती हॅूं तुम्हें अन्न पानी कौन देता है !’’
किनारे पर खड़े पति ने कहा...
‘‘ ए प्यारी! मैंने रग रग में महसूस किया है कि तुम न रहो तो एक दिन क्या, एक सेकेंड भी मैं जीवित नहीं रह सकता। तुम न रहो तो इस विश्व  ब्रह्माॅंड में प्रलय मच जायेगा। तुम मेरे लिये न सही इस विश्व  ब्रह्माॅंड के लिये ही पानी से बाहर आ जाओ और गहनों का बक्सा भी साथ ही लेती आओ। मैं एक चीज किसी भी तरह नहीं समझ पाया प्यारी! कि तुमने जब मरने जैसा एक मनहूस काम करने का निर्णय ले ही लिया है तो इस गहने के बाक्स को किसके लिये अपने साथ ले जा रही हो? अरे, इसे तो देती जाओ।‘‘

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