एक व्यापारी ने अपने दोनों पुत्रों को बुला कर कहा तुम लोगों के जिम्में सभी काम काज सौपकर मैं लम्बे समय के लिये तीर्थाटन पर जाना चाहता हॅूं। छोटे लड़के ने कहा ठीक है हमें अपना अपना हिस्सा दे दीजिये ताकि अपना अपना काम काज स्वयं ही सम्हालें।
बटवारा कर व्यापारी तीर्थ यात्रा पर चला गया । बड़ा लड़का कर्मठ था इसलिये अपने सभी सहयोगियों से कहता आओ! हम सब मिलकर यह काम इस प्रकार से करें ; और सब के साथ वह स्वयं काम करता और दूसरों से भी काम कराता। उसके कार्य व्यवहार से लोग इतने प्रसन्न थे कि व्यापार कुछ ही समय में पहले से और अधिक क्षेत्रों में फैलने लगा।
छोटा लड़का आलसी किस्म का था वह अपने कर्मचारी सहयोगियों से कहता जाओ! तुम वहाॅं जाकर इस काम को करो , जाओ तुमसे यह काम नहीं हो सकता... और स्वयं कुछ भी नहीं करता । कुछ समय में ही उसके व्यापार में हानि होने लगी, इस पर वह कर्मियों को और डाॅंटता, बार बार कहता जाओ तुम वह काम करो... धीरे धीरे उसका व्यापार इस तरह नष्ट हुआ कि उसे अपने लिये कर्ज में गुजारा करने के दिन आ गये।
यात्रा से वापस आने पर व्यापारी ने देखा कि बड़े लड़के ने तो कई गुना प्रगति कर ली और छोटे ने सब कुछ गंवा दिया जबकि वह दोनों को ही बराबर बराबर हिस्सा देकर गया था।
दोनों भाइयों ने जब पिता के तीर्थयात्रा से वापस आने पर स्वागत समारोह आयोजित किया तो उपस्थित गणमान्य लोगों में से एक ने छोटे ल़ड़के का धंधा असफल होने का कारण जानना चाहा। इस पर उन्होंने कहा कि छोटा कहता था जाओ, इसलिये छोटे का धन चला गया और बड़ा कहता था आओ, इसलिये बड़े के पास धन आता गया।
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