गाॅंव में बिजली के आते ही लगभग सभी ने अपने अपने घरों में कनेक्शन करा लिए। बड़े किसानों ने खेतों की सिंचाई करने के लिए पाॅच पाॅच हार्स पावर की मोटरें लगवा लीं। प्रारम्भ में एक दो माह तो सभी ने बिजली का बिल समय पर भरा फिर धीरे धीरे अधिकाॅंश लोगों ने बिल भरना बंद ही कर दिया। मैं नियमित रूप से अपने बिल को समय से भरता रहा। कुछ समय बाद तो अन्य लोग मुझे बिल जमा करते देख मेरी हॅसी उड़ाने लगे। जिन्होंने बिल जमा नहीं किया उनका बकाया निकाल कर बिजली कम्पनी ने अनेक नोटिस दिये पर वे लोग नहीं माने । अफसर लोग कनेक्शन काटने और बकाया रकम वसूल करने के लिए खेतों पर जाकर मोटर जब्त करने लगे। कुछ प्रभावी लोग स्थानीय विधायक से बोले,
‘‘ भैया! महिने में चार दिन भी पूरे समय बिजली नहीं आती पर, बिल जरूर आ जाता है। अब बताओ, हमारे गाॅंव भर के किसानों का कितना नुकसान हो रहा है और बिजली कम्पनी के अफसर हैं कि हजारों की बसूली के नोटिस दे रहे हैं; मोटरें जब्त कर रहे हैं, ये तो सरासर अन्याय है।’’
विधायक गाॅंव वालों के साथ ऊर्जामंत्री के पास पहॅुचे, उन पर दबाव बनाया, उन्होंने मुख्यमंत्री से सभी के बिल माफ करने की घेषणा करा दी।
कम्पनी ने सभी के बिल माफ करने संबंधी सूचना सब किसानों तक पहॅुचाई और जब्त की गई मोटरें भी बापस कर दीं।
मैं मानता रहा कि इस रियायत का फायदा जब सभी गाॅंव वासियों को मिला है तो मुझे भी मिलेगा और मेरे द्वारा भरे गए बिल का पैसा वापस किया जाएगा पर प्रयत्न करने पर भी कुछ नहीं मिला।
अब सोच रहा हॅूं कि यदि ईमानदारी इतनी नुकसानदायक है तो इस माह से बिल जमा करूं या नहीं ! ! !
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