उत्तर पूर्वी मध्यप्रदेश के एक जिले के प्राईवेट कालेज का सरकारीकरण होते ही मिसेज सिंह, अब अपने नाम के आगे प्रोफेसर लिखने लगीं। शिक्षकों का ट्राॅसफर होने लगा। पर, सत्ताइस साल हो गए किसी की क्या हिम्मत कि मिसेज सिंह को हटा सके। प्रारम्भ में आये सभी प्रिंसिपल उनके राजनेता पति का लिहाज करते रहे जिससे मिसेज सिंह की अयोग्यता छिपी रही। नई सरकार में नियम बनाया गया कि जो लोग तीन वर्ष से अधिक एक ही कालेज में रहे हों उनका विषयमान से अन्य कालेजों में ट्राॅंस्फर कर दिया जाए और मिसेज सिंह का ट्राॅंस्फर उसी नगर के गल्र्स कालेज में कर दिया गया। मिसेज सिंह वहाँ की प्रिंसिपल के तेज और अनुशासित स्वभाव को जानती थीं अतः वहाँ उनकी लापरवाही नहीं चल सकती थी इसलिए अपने नेता पति और पुत्र के माध्यम से ट्राॅस्फर निरस्त कराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाने लगीं। स्थानीय विधायक, विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री से स्थानान्तर निरस्त कराने के लिए टीप लगवाकर उनके पति और पुत्र सेक्रेटरी हायर एजूकेशन से मिले,
‘‘सर! मेरी पत्नी अस्वस्थ रहती हैं, चार पाॅंच साल ही रिटायर होने के लिए बचे हैं फिर भी उनका ट्राॅंसफर कर दिया है !! विधायकजी, मंत्रीजी और मुख्यमंत्रीजी चाहते हैं कि यह आदेश निरस्त कर दिया जाय, देखिए उनकी टीप...’’
और, सभी की टीप वाला आवेदन सेक्रेटरी के सामने रख दिया।
गंभीरता से सुनते हुए सेक्रेटरी ने पूछा,
‘‘ आपके घर से ये दोनों कालेज कितनी दूरी पर हैं?’’
‘‘ सर! ब्वाइज कालेज दो किलोमीटर और गल्र्स कालेज डेड़ किलोमीटर दूर है।’’
सेक्रेटरी ने अपने असिस्टेन्ट को बुलाकर पूछा,
‘‘ हिन्दी विषय के पद किन कालेजों में रिक्त हैं, बताइए?’’
‘‘ सर! सभी जगह सरप्लस में ही हैं केवल खरगोन में दो पद खाली हैं ।’’
‘‘ ठीक है, इस आवेदन को रिकार्ड में रखें और मिसेज सिंह को तीन दिन के भीतर खरगोन कालेज ज्वाइन करने का आदेश देकर सूचना मंत्रीजी को दे दें।’’
दोनों पिता पुत्र सेक्रेटरी को नेतागिरी दिखाते हुए धमकाने लगे,
‘‘ आप मंत्रीजी के लिखित आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं, सोच लेना आगे क्या होता है।’’
सेक्रेटरी ने फाइल असिस्टेंट को देते हुए कहा,
‘‘ पढ़िए ! मंत्रीजी ने क्या लिखा है ‘ नियमानुसार कार्यवाही कर सूचित करें ’ हमने
इसी आदेश पालन किया है, कृपा कर अब जाइए।’’
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