‘‘ सर ! पुलिस वाले वाहनों को क्यों रोकते हैं हमारी बस को भी देर तक रोके रहे?’’
‘‘ जिनके इन्श्योरेंस, लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन, हेलमेट आदि नहीं हैं उन्हे रोक कर उनका फाइन किया जाता है।’’
‘‘ ऐसा क्यों किया जाता है?’’
‘‘ सामाजिक व्यवस्था बनी रहे, यातायात सुरक्षित रहे, इसीलिए इस प्रकार के नियम कानून बनाए जाते हैं।’’
‘‘ यदि व्यवस्था अपने आप बनी रहे, तो फिर नियम कानून का कोई महत्व ही नहीं है?’’
‘‘ तुम्हारा तर्क तो सही है, लेकिन अनेक लोगों का स्वभाव इस तरह का होता है कि वे अन्याय, अत्याचार, शोषण, भ्रष्टाचार कर व्यवस्था को बिगाड़ने में ही अपनी बहादुरी समझते हैं इसीलिए कानून बनाए जाते हैं; उनका जो उल्लंघन करता है उसे कानून दंड देता है।’’
‘‘ परन्तु सुना है जिन अपराधियों को दंड मिलना चाहिए वे तो किसी न किसी प्रकार बच निकलते हैं और निरपराधी फॅस जाते हैं?’’
‘‘ समाज में जब इस प्रकार के अपराधियों की संख्या बढ़ जाती है और जनसामान्य का जीवन दूभर हो जाता है तो भगवान मनुष्य रूप में आकर उनसे संघर्ष करते हैं और मृत्यु दंड देते हैं।’’
‘‘ परन्तु यह मेरी समझ में नहीं आता कि कोई भी व्यक्ति हमारे लिए अपने को संकट में डालने क्यों आएगा, इन दुष्टों को मारने और स्वयं मरने के लिए क्यों आएगा? ’’
‘‘ शास्त्र तो यही कहते हैं।’’
‘‘ क्या इस प्रकार का सोच आलसी और अकर्मण्य लोगों का नहीं है? क्या हमें उसके आने की प्रतीक्षा ही करते रहना चाहिए? हमें अपनी रक्षा करने का निर्णय स्वयं क्यों नहीं करना चाहिए?’’
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