‘‘रूपसींग ! रूपसींग ! बाहर निकलो, देखो तुम्हारे कुत्ते ने हमारे मुर्गे को खा लिया ।’’
‘‘अरे धनसींग ! क्या हुआ? क्या कह रहे हो?’’
‘‘ अपनी आंखों से देख लो, वो तुम्हारा कुत्ता हमारे मुर्गे को खा रहा है?, जब कुत्ते को खिला नहीं सकते तो पालते क्यों हो? ’’
‘‘ ऐंसी बात नहीं है धनसींग! तुम तो इस प्रकार कह रहे हो जैसे हमने जानबूझकर कुत्ते से तुम्हारे मुर्गे को खाने के लिये कह दिया हो? मुर्गा तो मुर्गा ही है, उसे कोई न कोई, कभी न कभी तो खाता ही, चाहे तुम खाते या कोई और...?’’
‘‘रूपसींग ! तुम ज्यादा बकवास न करो, कुत्ता पालने का इतना ही शौक है तो उसे बाॅंध कर क्यों नहीं रखते, हमारा रोज कुछ न कुछ नुकसान करता रहता है?’’
‘‘ तो तुम क्यों नहीं अपने मुर्गे को बाॅंध कर रखते, हमारे छप्पर पर बैठ बैठ कर खपरे खिसका कर तोड़ता रहता है?’’
जोर जोर से हो रही बातें सुनकर दोनों घरों से महिलायें आईं और एक से स्वर में एक दूसरे पर आरोप लगाते हुए पुरुषों में चल रहे द्वंद्व को अपने हाथों में ले मोर्चा सम्हालने लगीं। माताओं को उलझते देख दोनों ओर से बच्चे भी इस संग्राम में कूद पड़े , फिर क्या था पुरुष महिलायें और बच्चे अपने अपने मोर्चे पर इस प्रकार डटे कि खूनखराबा होते देर न लगी। पड़ौसी दूर से युद्व का मजा लेते रहे । अन्त में दोनों पक्षों के कुल ग्यारह घायल लोग जिला अस्पताल में भरती हो गये। दोनों पक्षों ने एक दूसरे के विरुद्ध पुलिस में प्रकरण दर्ज करा दिया इसलिये पुलिस बयान लेने अस्पताल में आयी । इंस्पेक्टर ने पूछतांछ कर स्थिति समझी और बोला,
‘‘ अरे मूर्खो ! अब मुर्गे की कीमत से हजार गुना खर्च करते रहो डाक्टरों और दबाइयों में, बकीलों और कोर्ट में। लगाते रहो रोज चक्कर यहाॅं से वहाॅं और करते रहो बरबाद सबकी जिंदगी। लूट, मारपीट और हत्या के प्रयास करने की धारायें लगेंगी, फिर जेल काटना, समझे ? करो यहाॅं दोनों लोग दस्तखत ।’’
‘‘ अरे साब! हम गरीब अदमी हैं, केस मेस मत चलाओ, यहीं निपटा दो’’
‘‘ तो पहले लाओ हमारी फीस हम केस नहीं बनायेंगे। बस, यहाॅं दस्तखत करके अपनी अपनी रिपोर्ट वापस ले लो’’
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