Sunday, August 16, 2020

63 युवा सोच


भीड़ वाले रास्ते में दाॅंयी ओर से चलते हुए एक बाइक पर तीन नवयुवक मस्ती करते जा रहे थे। आने जाने वाले लोग डरते, बचते, बड़बड़ाते, चलते जाते। थोड़ी दूर चलने पर एक ट्रेफिक पुलिस के कान्सटेबिल ने उन्हें टोका और चेताया कि राॅंग साइड जा रहे हो राइट चलो? 

उनमें से एक बोला, ‘राइट ही तो चल रहे हैं? '

आगे चैराहे पर भी वे दायीं ओर से ही मुड़े, ट्रेफिक पुलिस के हवलदार ने रोका और कहा, ‘आपलोग पढ़े लिखे हैं? राइट साइड से चलना चाहिये, क्या यह नहीं जानते यह राॅंग साइड है? '

वे बोले ‘अंकल! आप क्या यह नहीं जानते कि ‘‘आरआइजीएचटी, राइट " राइट माने दायाॅ '। तो, हम लोग क्या गलत हैं? हवलदार आगे कुछ कहता कि वे तत्काल फुर्र हो गये।

वे कुछ दूर चले ही थे कि सामने से आते हुए एक सबइंस्पेक्टर से टकराते टकराते बचे। इंस्पेक्टर ने उन्हें रोककर पूंछा कि क्या उन्हें देश का कानून नहीं मालूम? उन्होंने जबाब दिया , ‘कैसा कानून? राइट को राॅंग और राॅंग को राइट सिखाते हो? इसीलिये तो  देश में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है? यह कितना उचित है? हम ऐंसे कानून को बदलना चाहते हैं।'

इंस्पेक्टर अपनी बाइक से उतर कर एक युवक की कालर पकड़ने के लिये अपना हाथ बढ़ा ही रहा था कि वे तेजी से फिर भाग निकले, इंस्पेक्टर उनकी बाइक का नंबर लिखने का प्रयास ही करता रहा। 


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