Tuesday, September 15, 2020

119 भृत्य का बेटा


  निष्ठा और ईमानदारी से प्रभावित होकर अफसर ने कार्यालय के भृत्य के रिटायर होने के बाद उसके बेरोजगार लड़के को वन विभाग के स्थानीय चेक पोस्ट पर बैरियर बंद करने और खोलने के काम पर लगवा दिया जहाॅं पर दो फारेस्ट गार्डों की चेकिंग ड्युटी थी। आठ घंटे की ड्युटी के स्थान पर बारह घंटे रुकना पड़ता। डयुटी के दौरान फारेस्टगार्ड ही वाहनों की चेकिंग करते और उन्हें अनधिकृत माल को बैरियर से बिना कार्यवाही के निकाल देने के बदले में प्रति ट्रक तीन सौ से चार सौ रुपये तक मिल जाते जिसमें रेंजर का हिस्सा अलग करने के बाद लड़के को एक सौ रुपये प्रति दिन देकर शेष राशि को दोनों बराबर बराबर  बाॅंट लेते । 

एक दिन कुछ देर के लिये वह लड़का अकेला ही ड्युटी कर रहा था कि एक बूढ़ी  भैसों से भरा ट्रक आया , उसने जांच के लिये बैरियर लगाया, ड्राइवर ने फौरन चारसौ रुपये उसे दिखाये पर उसने ट्रक में भरे माल से संबंधित पूरे कागजाद न पाये जाने के कारण आगामी कार्यवाही के लिये पुलिस को सौंप दिया, इतने में ड्युटी वाले दोनों फारेस्टगार्ड आ गये । वे , उसको बहुत डाॅंटते हुए बोले -

‘‘अबे, कैसी मूर्खता करता है! अब पुलिस वाले उससे एक हजार रुपये लेकर अंत में छोड़ ही देंगे ना ! तुम्हें क्या मिलेगा? अपना तो चार सौ रुपया प्रति ट्रक फिक्स है, ले लेते , इसी से तो तुम्हें वेतन मिलता है?’’

‘‘ लेकिन सर! उसमें तो बूढ़ी भैसें थीं जो वे शहर में उन्हें कटने के लिये, बेचने ले जा रहे थे’’

‘‘ तो! तुम्हारा क्या चला जाता?? सभी जगह यही हो रहा है, गायें हों या भैसें जब तक दूध देती हैं तब तक सब ठीक, बाद में कसाई को ही बेचा जाता है, क्या यह तुम्हें मालूम नहीं है?’’

यह सुनकर वह तत्काल दुखी मन से अपने घर आकर एक ओर उदास बैठ गया।  उदास बैठा देख उसके पिता ने पूछा-

‘‘क्यों बेटा! क्या बात है, आज तो जल्दी आ गये, तबियत खराब है क्या?’’

‘‘नहीं, अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिये घर वापस आ गया हॅूं और सोचता हॅू कि पिछले सात आठ दिन में जो कुछ इस काम से कमाया है उससे भिखारियों को भोजन करा दॅूं और किसी सात्विक कार्य की तलाश में जुट जाऊं।’’ 


No comments:

Post a Comment

221 चिंजा की शादी

5 वीं क्लास में पढ़ रहीं स्वभाव से सीधी सादी सहुद्रा और भोली सी चिंजा में गहरी दोस्ती थी। चिंजा की स्पष्टवादिता से क्लास के सभी लड़के लड़किय...