‘‘सर! पिछले सप्ताह में कुछ व्यापारियों ने चुनाव के लिये जो चंदा दिया था वह करीब डेड़ करोड़ है और सभी पाॅंच सौ और एक हजार के नोट हैं, क्या करें? उन्हें किसी खाते में जमा करा दें ? टैक्स काटकर दस पन्द्रह लाख तो बच ही जायेगा?’’
‘‘ तुम ठीक कहते हो, पीए। पर यह बताओ कि हमारा बिजली और नगर निगम का कितना टैक्स बकाया है?’’
‘‘ सर ! पिछले नोटिस के अनुसार अभी तक लगभग सन्तावन लाख बिजली, बानवे लाख प्रापर्टी और पन्द्रह लाख पानी का टैक्स बकाया है’’
‘‘ जब सरकार को टैक्स देना ही है, तो जाओ नोट बंद हो जाने के कारण केवल आज रात तक ये दोनों आफिस पाॅंच सौ और एक हजार के नोट ले रहे हैं, सभी टैक्स जमा कर दो’’
‘‘ गुड आइडिया सर ! ! टैक्स न भरने का कुछ तो ‘‘क. .लं. .क’’ मिटेगा, यह कहना चाहता था, परन्तु मंत्री जी की आंखों की ओर देख बोला.. , मेरा मतलब टैक्स भरने का कुछ तो श्रेय मिलेगा ’’
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