‘‘सर! कोई अंकल मिलने आये हैं, कहते हैं विधायक के पीए हैं।’’
‘‘ओ ! हो! नमस्कार श्रीवास्तव साहब, आइये आइये। यहाँ बैठिये। इतनी गर्म दोपहरी में क्यों कष्ट किया, फोन कर देते, हम ही आ जाते ...... राजू ! जा बढ़िया शर्वत ले आ. . ’’
पीए साहब अपना काम कराके वापस गये ही थे कि राजू फिर चिल्लाता आया,
‘‘ सर! कोई अंकल मिलने आये हैं, कहते हैं प्रोफेसर पाण्डे हैं। ’’
‘‘ओफ् ओ! इनको चैन नहीं है, राजू ! उन्हें बाहर ही बिठाओ, बोल दो कि आते हैं। ’’
प्रोफेसर पान्डे बाहर बरामदे में पड़ी कुर्सी पर बैठे प्रतीक्षा करते, पढ़े पढ़ाये समाचार पत्र बार बार उलटते पुलटते, घड़ी देखते रहे , अचानक.. ..
‘‘अरे, पाण्डे जी! कहो सब ठीक तो है। ओफ् ओ! गर्मी बहुत है आज, बोलो कैसे आये? ’’
‘‘ बहुत दिनों से यूजीसी के प्रोजेक्ट का मेरा प्रपोजल अधूरा पड़ा है उसी पर आपका परामर्श लेने उस दिन आफिस में आपसे बात की थी, आपने घर पर आने को कहा था इसलिये .. .. ’’
‘‘ अच्छा! फाइल को छोड़ दीजिए मैं रात में उसे पढ़कर कल आफिस में आपसे बात करता हॅूं, ठीक ? कल आफिस में ही मिलेंगे, भई बहुत गर्मी है .. ..।’’
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