अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर बुलाए गए विदेश की ‘‘योगा ट्रेनिंग इन्सटीटृयूट’’ के डिमांस्ट्रेटर्स द्वारा किए गए प्रदर्शन के बाद संस्था के संचालक ने उद्घोषणा की,
‘‘ हमारी संस्था ने योगा करने के लिए बहुउपयोगी आसन का अनुसंधान कर उसका निर्माण भी किया है । इस आसन पर योगा करने से अपेक्षतया शीघ्र ही लाभ मिलने लगता है, शरीर स्वस्थ हो जाता है, ध्यान स्थिर हो जाता है और आत्मानुभूतियाॅं होने लगती हैं, अतः जो कोई भी इसे लेना चाहता है वह ले सकता है मूल्य केवल 2500 रुपये।’’
अनेक व्ही आइ पी दर्शकों सहित नेताजी भी एक आसन क्रय कर लाये और अपने घर के बगीचे में अभ्यास करने के लिए उन्होंने वह आसन बिछाने के लिए माली को आदेश दिया । माली ने पूछा,
‘‘ क्या यह आसन आप विदेश से मंगाए हैं साहब?’’
‘‘हाॅं, इसकी कीमत ढाई हजार रुपये है।’’
‘‘ अरे साहब! हमसे कहे होते, हमारे गांव के खेत की मेढ़ पर यह घास बहुत होता है, उखाड़ उखाड़ कर फेकना पड़ता है। ज्यादा से ज्यादा एक सौ रुपया भी खर्च नहीं होते, हम तो बनाना भी जानते हैं, यह कुशासन कहलाती है।’’
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