अपनी आत्मनिर्भर, सुन्दर, योग्य, और सुशील पुत्री के लिए उसके स्तर का वर खोजने में पिता ने अपनी पूरी ताकत लगा दी पर कहीं भी बात नहीं बनी । अवसादग्रस्त होते पति की दशा जब पत्नी से नहीं देखी गई तो एक दिन साहस बटोरकर वह पुत्री से बोली,
‘‘ क्या बात है बेटी, कल जिसे देखा वह लड़का तो पद में तुम से बड़ी नौकरी में है, सुन्दर भी है, फिर भी तुम्हें पसंद नहीं आया? इसके पहले, उद्योगपति के इंजीनियर बेटे और विद्वान प्रोफेसर के डीएसपी बेटे को भी तुमने पसंद नहीं किया?’’
‘‘हाॅं! वे सचमुच बड़े पदाधिकारी, सम्पन्न / विद्वान हैं ।’’
‘‘ तो, संकोच किस बात का है जो अब तक मौन ...?’’
‘‘ माॅं! मैं किसी ‘इन्सान’ को ही वरण करूंगी । ’’
No comments:
Post a Comment