Tuesday, September 8, 2020

75 असर प्रवचन का


आटोरिक्षा में वैठे दो सज्जन चर्चा करते जा रहे थे,

 ‘‘वाह भाई! मान गये आज की कथा में तो मजा आ गया, भीड़ भी बहुत थी।‘‘

‘‘हाॅं यार! मैं भी यही सोच रहा था कि यहाॅं आना सार्थक हो गया‘‘

एक अन्य सहयात्री ने पूछा,

‘‘भाई साब! क्या हुआ थोड़ा हमें भी बताना, हम वहाॅं नहीं जा पाये तो कम से कम आप लोगों के द्वारा ही सही, हमें भी धर्म लाभ मिल जाये‘‘

‘‘अरे साब क्या बतायें, ऐसा प्रवचन हमने पहले सुना ही नहीं और न देखा, लोग उछल उछल कर नाच रहे थे, सुन सुन कर रो रहे थे, भाई वाह!‘‘

‘‘ तो, कुछ तो संक्षेप में उस वार्ता को बताइये‘‘

‘‘ वही, जैसे , सच बोलना चाहिये, किसी को कष्ट नहीं देना चाहिये, दूसरों की मदद करना चाहिये ‘‘ आदि आदि...... 

इसी बीच उन में से एक ने कहा ‘‘रोकना भाई हमारा स्थान आ गया‘‘

आटोवाले ने  कहा ‘ पाॅंच रुपये ‘

वे बोले, ‘‘अबे! चार कदम के पाॅंच रुपये? बाहर से आया है क्या? ले रख, दो रुपये तो लगते ही हैं तू तीन ले ले... ..‘‘

और वे चलते बने, आटो वाला चिल्लाता रहा.... 

‘‘भाई साब ! भाई साब ! दो रुपये और देते जाइये....?‘‘ 

उन्होंने एक न सुनी ।

आटोवाला बड़बड़ाता रहा , ‘‘ यही प्रवचन सुनकर आये हैं, ढोंगी कहीं के.... ‘‘


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