जनरेशन गेप
विश्वनाथ मन्दिर के दर्शन कर सकरी गली में से लौटते हुए एक यात्री ने बनारस के बाजार की मुख्य सड़क के किनारे देखा कि एक हलवाई बड़ी कड़ाही से पूड़ी निकालते हुए चिल्ला रहा है ,
‘‘गर्मागर्म, गर्मागर्म, चार रुपये में गर्मागर्म छै पूड़ी, गर्मागर्म छै पूड़ी‘‘
सज्जन यात्री ने आवाज सुनी तो पास जाकर छै पूड़ी का ऑर्डर दिया, हलवाई ने तीन गर्म और तीन बासी पूड़ी तत्काल दे दी।
सज्जन ने पूड़ियों को उलट पलट कर देखा और बोले,
‘‘ये क्या? तीन पूड़ी तो बिलकुल बासी हैं?‘‘
हलवाई बोला, ‘‘गर्मागर्म हैं कि नहीं? लगता है बनारस में नए आये हो ? इतनी सी व्याकरण नहीं जानते?‘‘
‘‘क्या मतलब?’’
‘‘गर्मागर्म = गर्म + अगर्म, होता ही कि नहीं ?
इसलिए तीन पूड़ी गर्म और तीन पूड़ी अगर्म दी हैं, इसमें क्या गलत है?’’
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