Monday, June 1, 2020

30 ऊर्ष्ट गर्दभ संवाद



 ‘‘वाह!! क्या रूप है! क्या लावण्य है! कामदेव भी इसे पाने के लिये तरसते हैं।’’

 ‘‘वाह!! क्या ध्वनि है! क्या लय, क्या तान है! वीणावादिनी भी इसे पाने के लिये लालायित हैं।’’

No comments:

Post a Comment

221 चिंजा की शादी

5 वीं क्लास में पढ़ रहीं स्वभाव से सीधी सादी सहुद्रा और भोली सी चिंजा में गहरी दोस्ती थी। चिंजा की स्पष्टवादिता से क्लास के सभी लड़के लड़किय...