"जानते हो? मेरा भाई बनारस गया है।"
" क्यों?"
"संन्यासी की ट्रेनिंग लेने।"
"संन्यासी बनने के लिये ट्रेनिंग... ह ह ह।"
"तुम्हें तो मेरे मायके के सभी लोगों पर हंसने के अलावा कुछ आता ही नहीं है। तुम क्या जानो कि संन्यासियों को कितना कष्ट में रहना पड़ता है, भूखे प्यासे रहकर तपस्या करना, मांग कर खाने के लिये यहाॅं वहाॅं भटकना, क्या सरल होता है?"
"लेकिन इसमें ट्रेनिंग लेने की क्या जरूरत? संन्यासी तो स्वभाव से ही होते हैं उन्हें बनाया थोड़े ही जाता है।"
"अच्छा! खुद कुछ करके बताओ तब जाने।"
"अच्छा! गुड वाय.... नेवर सी यू अगेन...."
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