राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्र स्वयंसेवकों द्वारा एक गाॅंव के बाहर दिसम्बर माह के अंत में लगाए गए केम्प में नियमानुसार रात को टेन्टों में सोते समय सुरक्षा करने के लिये दो दो स्वयंसेवकों की रात दस बजे के बाद से दो दो घंटे की ड्युटी लगाई गई। बारह से दो और दो से चार बजे तक की ड्युटी करने वालों ने रात में डर न लगे इसलिये आपस में मिलकर एक साथ चार बजे तक ड्युटी करने की योजना बना ली। शहरी परिवेश में पले सम्पन्न परिवारों के ये लड़के जो अपने घरों में छोटे मोटे काम के लिये भी नौकरों पर अश्रित रहते थे अब सभी काम अपने हाथ से करने और दूसरों की सेवा करने के लिये संकल्पित थे। कड़कड़ाती ठंड में टेन्ट के बाहर लकड़ियाॅं जलाते चारों अपनी ड्युटी पर डटे थे। अचानक पास में लगे पीपल के पेड़ की एक ओर की डालियाॅ हिलने लगीं, खरखर की आवाज आने लगी। टार्च की लाईट फेक कर देखते हुए चारों सोचने लगे कि हवा चलती तो अन्य डालियाॅं भी हिलती परन्तु केवल इन दो चार छोटी छोटी डालियों की ओर से ही आवाज आ रही है, क्या कारण हो सकता है। चारों के मन में भूत होने की शंका उत्पन्न हुई फिर भी चारों डटे रहे। थोड़ी देर में फिर से खरखर के साथ चट चट की आवाज भी सुनाई दी। अब तो उनके मन का संदेह इतना बढ़ गया कि बारह से दो बजे की ड्युटी वाले अपने टैन्ट में जाने लगे और कहने लगे कि चार से छः बजे तक ड्युटी करने वालों को जगाये देते हैं वे लोग अभी से आ जायेंगे । आपस में जोर जोर से बातें होने लगी जिसे सुनकर कुछ लड़के जाग कर उनके पास आ गये। इतने में फिर से दूसरी ओर की डालियों में खरखराहट और चटचट की आवज होने लगी । एक ने जोर से कहा ‘भूत आया, भूत आया’। हल्ला सुनकर प्रोग्राम आफीसर आए और कारण जाना। वे बोले ‘‘ चलो देखते हैं वहाॅं है क्या? ’’
डरते डरते सब उस पेड़ के नीचे पहुॅंचे और टार्च से देखा कि जो डालियाॅं अभी अभी हिल रही थीं और पत्तों में खरखर की आवाज हो रही थी वे गीली हैं। अचानक एक पतली सी सूखी डाली का टुकड़ा चट की आवाज करते हुए प्रोग्राम आफीसर के सिर पर गिरा। सभी घबराये परन्तु जब हाथ से उस डाली के टुकड़े को उठाया तो पाया कि वह भी गीला है । आस पास की झाड़ियों के पत्तों पर देखा तो ओस की बूंदे चमक रही थीं।
प्रोगा्रम आफीसर ने समझाया कि ‘‘ भूत नाम की कोई चीज नहीं होती है, देखो! ओस के कारण पीपल के पत्तों पर गीलापन है और यही पानी जब अधिक हो जाता है तो बहकर अन्य पत्तो पर गिरता है जिससे वे हिलते हैं और आपस में टकराने से खरखर की आवाज होती है। सूखी सूखी पतली टहनियों पर जब यही ओस की बूंदे पत्तों से बह कर उसे गीला कर देती हैं तो भार के कारण वह टूट कर नीचे गिरने लगती है और उन्हीं के टूटने से चटचट की आवाज आती है। अब किसी को डरने की जरूरत नहीं ।’’
डरने वाले लड़के ने प्रश्न किया‘‘ सर! यदि यही बात है तो पीपल के पेड़ के पत्ते ही क्यों हिलकर आवाज करते हैं, पास में लगे दूसरे पेड़ों से आवाज क्यों नहीं आती?’’
आफीसर बोले,
‘‘ पीपल के पत्ते चिकने, चैड़े और लम्बे डंठल वाले होते हैं इसलिये वह ओस को अधिक एकत्रित कर नीचे अन्य पत्तों और डालियों पर बहा देते हैं जिससे आवाज होती है और देर तक हिलते रहते हैं।’’
अगले दिन से, बारह बजे से चार बजे की रात ड्युटी चाहने वालों में स्पर्धा होने लगी।
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