‘‘ बड़े भाग्यशाली हैं, बहुत लम्बी आयु पायी, बहुत होते हैं एक सौ सात साल ! "
‘‘ सच? एक सौ सात साल! इतने सालों में उन्होंने कुछ अनुकरणीय या समाज हित में उल्लेखनीय काम किया हो तो बताएं?’’
‘‘ उल्लेखनीय?’’
‘‘ हाॅं, ऐंसे कार्य जिन्हें हम अपने जीवन में उपयोगी कह सकें और उनका पालन करते हुए उन्हें आदरपूर्वक याद रख सकें?’’
‘‘ कई राज्यों में व्यवसाय फैलाया, बहुत धन कमाया, सात लड़के लड़कियाॅं हैं, वे भी अच्छी पोजीशन में हैं, उन्हीं की तरह धन कमा रहे हैं, बहुत नाम और प्रभाव है उन सबका’’
‘‘ ये कोई बड़ी बात नहीं, ये तो सभी लोग करते हैं, कभी उनसे अवकाश के समय मिलने और बातचीत करने के अवसर पर यदि उनके जीवन के अनुभवों या सफलता के रहस्यों पर उन्होंने कुछ बताया हो तो वह बताओ, उससे दूसरे लोग भी लाभान्वित होंगे ’’
‘‘ नहीं, मैं तो अनेक बार उनके निकट सम्पर्क में आया पर पहले तो वे अपने धंधे में ही उलझे रहते और पचास की उम्र के बाद तो प्रायः बीमार ही रहते थे। देश भर के अनेक अस्पतालों में उनका इलाज चलता रहा, अन्त में घर में ही बीमारी से जूझते रहे।’’
‘‘ तो इस प्रकार के उनके लम्बे जीवन को तुम बहुत बड़ी उपलब्धि मानते हो? इससे अच्छा और लम्बा जीवन तो केंचुओं का होता है जो अपने शरीर के टुकड़े टुकड़े हो जाने के बाद भी जीवित रहकर हमें उपजाऊ मिट्टी देते रहते हैं।’’
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