Wednesday, September 23, 2020

164 टेक्नीक अपनी अपनी

‘‘ आइए आइए ! हम अभी आपको दिखाएंगे कि अधर में ही यह रस्सी किस प्रकार अपने आप लटक जाती है ! इसी पर फिर यह छोटी सी लड़की किस प्रकार बिना रुके चढ़ती जाती है ! आइए ! आइए ! ’’

बाजार में जादूगर अपना खेल दिखाते हुए चिल्ला रहा है। दर्शक उत्सुकता से उस क्षण को देखने के प्रयास में धक्का मुक्की कर अपने को आगे की कतार में लाने को संघर्ष कर रहे हैं और लो, वह मोटी रस्सी अचानक जादूगर के हाथ से सरकती हुई एकदम लम्बवत स्थिर दिखाई देने लगती है और पास खड़ी जादूगर की बच्ची उसे दोनों हाथों से पकड़कर ऊपर की ओर चढ़ती जाती है। जादूगर अचानक रस्सी को छोड़ देता है और वह बच्ची धड़ाम से नीचे आ गिरती है पर कोई चोट नहीं! दर्शक तालियों की झड़ी लगाकर वाह वाह करते नहीं थकते।

‘‘ तो दोस्तो! आपने यह कमाल देखा? यह लड़की उतनी ऊंचाई से गिरी परन्तु खरोंच भी नहीं आई, इसका कारण है मेरे द्वारा बनाई गई यह दवा जो अनेक प्रकार की चोटों के लिए ही नहीं, सर्दी, खांसी, निमोनिया, पीलिया, मलेरिया और हैजा जैसे रोगों पर भी इसी चमत्कार के साथ लाभ पहुंचाती है। एक शीशी की कीमत दस रुपये, पाॅंच शीशियों की कीमत चालीस रुपये, जिस किसी को भी लेना हो ले ले, थोड़ी सी ही बची हैं।’’

उस एरिया में ड्युटी कर रहा सिपाही कुछ ऊंचाई पर खड़ा दूर से इस भीड़ पर निगहें गड़ाये था, दवा खरीदने के लिए जब भीड़ में उथल पुथल देखी तो पास आकर बोला,

‘‘ क्यों रे ! सबको उल्लू बनाता है, मुझे तो कोई चमत्कार नहीं दिखा, तू केवल आंखे बंद किये खड़ा था और यह लड़की यहीं बैठी थी? सबको हिप्नोटाइज कर इस राख को बेचता है? चल थाने ।’’ 

‘‘ अरे साब! थाने की बात क्यों करता है, नोट खींचने की अपनी अपनी टेक्नीक है, वो हमारी और ये तुम्हारी, अरे! लो ये लो, और जरा दूर से ही खेल देखो। ’’ 


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