‘‘ अरे! इस स्थान पर तुमने ये कौन से पौधे लगा दिए?’’
‘‘ चन्दन के हैं साहब ! मेरे बिचार से उनके लिए यही सबसे अच्छा स्थान रहेगा’’
‘‘ अपने बिचार को अपने पास ही रखो, यहाॅं ‘कैक्टस’ लगाओ, समझे’’
‘‘ ये कैक्टस कौन सा है साहब?’’
‘‘ वहाॅं पर देखो, चमकीले बाक्स में रखे हैं’’
‘‘ ये तो नागफनी हैं साहब, इनके काॅंटे बड़े खतरनाक होते हैं! इन्हें लगाना है...?’’
‘‘ हाॅं इनके लिए यही स्थान आरक्षित है।’’
‘‘ क्या कहते हो साहब! इतनी अच्छी जगह इन काॅंटों के लिए? मेरी बात मान लीजिए इन्हें कहीं दूसरी जगह लगाए देते हैं, यहाॅं तो चन्दन ही ... ’’
‘‘ क्या समझ में नहीं आता? जो कहा है वैसा ही करो, यहाॅं कैक्टस ही लगाए जाएं।’’
‘‘ तो चन्दन वहाॅं सामने की ओर लगा दें साहब!’’
‘‘ नहीं वह जगह तो मंत्री जी ने ‘सुबबूल’ के लिए आरक्षित कर दी है । ’’
‘‘ ओह!! तो चन्दन के लिए कोई जगह नहीं है .. ..?’’
‘‘ हाॅं है, तुम्हारे खेत की मेंड़ पर ... ’’
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