‘‘ समझ में नहीं आता किसके यहाॅं जाऊं और किसके यहाॅं नहीं! एक ही दिन चंदनसिंह बुंदेला और रामरतन यादव दोनों की लड़कियों की शादी है।’’
‘‘दोनों ही तुम्हारे स्कूल के दिनों के मित्र हैं, मेरे अनुसार तो किसी प्रकार व्यवस्था करके दोनों जगहों पर उपस्थिति देना चाहिये, आखिर दोनों के यहाॅं लड़की की शादी है?’’
‘‘तुम ठीक कहती हो, मेरा भी यही विचार है, परंतु जब से हमारे सुपुत्र ने अन्तर्जातीय विवाह कर लिया है तब से मेरे साथ चंदनसिंह का व्यवहार ही बदल गया है। वह हर समय मौके की तलाश में रहता है कि कैसे मेरा सार्वजनिक मजाक उड़ा कर अपमानित कर सके।’’
‘‘ इसमें किसी को क्या दोष दें, मातापिता की गलतियों का परिणाम संतान को और संतान की गलतियों का परिणाम माता पिता को ही तो भोगना पड़ता है, यही संसार का नियम है’’
‘‘ यह तो ठीक है, परंतु यदि कोई सम्मान पूर्वक मुझे विष पिला दे तो मैं सहर्ष पी सकता हॅंू परंतु अपमान के साथ दिया गया अमृत कभी नहीं। यद्यपि रामरतन से मेरे सैद्धान्तिक मतभेद प्रारंभ से ही रहे हैं परंतु उसने मुझे आदरपूर्वक बुलाया है अतः मेरा विचार तो वहाॅं जाने का ही है ।’’
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