Tuesday, September 15, 2020

113 कट्टरता


‘‘ क्यों ! शिमला मिर्च किस भाव से दी है ?’’

‘‘साठ रुपया किलो’’

‘‘और परमल‘?’’

‘‘पचास रुपये’’

‘‘ कुछ कम कर लो भाईजान! एक, एक किलो चाहिये हैं?’’

‘‘ एक किलो लो या एक क्विंटल रेट यही लगेंगे’’

‘‘ अरे, सही सही बताओ यार! कुछ तो कम कर लो’’

‘‘ अरे साब! अन्ठावन और अड़तालीस रुपया प्रति किलो की खरीदी चीज को साठ और पचास में नहीं बेचेंगे तो इस 46 डिग्री में बैठकर हम अपने बालबच्चे कैसे पालेंगे?’’

‘‘सच बोलना भाईजान, रोजे चल रहे हैं?’’

‘‘ अरे साब! रोजों को बीच में क्यों लाते हो, रोजे अपनी जगह और धंधा अपनी जगह?’’

‘ क्यों ? कामधंधा ठीक तरह से चलता रहे इसीलिये तो रोजे रखते हो? धर्म और कर्म में अन्तर क्यों करते हो?’’

‘‘ देखो साब! लेना हो तो लो, रेट कम नहीं होंगेे, नहीं तो अपना रास्ता देखो, रोजे और धर्म के बारे में आप हमें कुछ मत सिखाईये, ज्यादा खींचतान की तो हम अपने असली धर्म पर उतर पड़ेंगे, समझे?’’


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