शहर के सबसे नामी स्कूल की प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट आया, बेटा एक नंबर से चूक गया। उसी रात को दोस्त की लड़की की शादी में भोपाल नहीं जा सका क्योंकि रिजर्वेशन वेट लिस्ट तीस से आकर एक में अटक गयी। सोचा कि सिनेमा ही देख लिया जाये, पार्किंग करते-करते टिकिट लेने पहुंचे तो काउंटर वाला बोला, “हाऊसफुल हो गया साहब, लास्ट टिकट भी बिक गयी!” लौटते समय अपनी प्रिय मैगजीन लेने बुक स्टाल पहुंचा, दुकानदार ने बताया कि अंतिम प्रति अभी-अभी बिकी है। ये हो क्या रहा है मेरे साथ इन दिनों, चाही हुई हर चीज बस मिलते-मिलते, हर काम बस होते-होते रह जाता है। पत्नी ने बताया कि उनके साथ भी कई दिनों से कुछ ऐसा ही हो रहा है और जैसी कि उम्मीद थी, उनके मुताबिक हमें जल्दी से जल्दी पूजा-पाठ करानी चाहिये। खानदानी पंडितजी ने फोन पर बताया कि शनि का प्रकोप है, उन्हें प्रसन्न करना होगा, पूजा के लिये उनका दूसरे दिन ट्रेन से आना तय हुआ। यहां पूजा की पूरी तैयारी थी, उधर से पंडितजी का फोन आया कि पकड़ते-पकड़ते ट्रेन छूट गयी। पूजा धरी की धरी रह गई, पत्नी बुरी तरह डर गयी, न जाने क्या होने वाला है!
पत्नी बोली, पूजा की पूरी तैयारी है, शनि के प्रकोप से विघ्न पड़ रहे हैं इसलिये भले ही किसी लोकल पंडित से ही सही पर अब पूजा हर हाल में करा ही ली जाना चाहिये। उनका सोचना था कि खानदानी पंडितजी के मार्फत शनि को प्रसन्न जब करेंगे तब करेंगे, अभी अस्थायी रुप से हल्का-फुल्का शांत तो कर ही लें। एक लोकल पंडित को लेने के विचार से मंदिर पहुंचा, पंडितजी के चेले ने बताया कि आप थोड़ा लेट हो गये, अभी एक ही मिनट पहले कोई और यजमान आधे घंटे के लिये पंडितजी को ले गया है। दिमाग तो खराब हो गया पर बाहर आकर स्कूटर में बैठ गया, ठान लिया कि आधे घंटे यहीं इंतजार करुंगा पर पंडितजी को लेकर ही जाऊंगा। यह सूचना पाकर पत्नी ने सुझाव दिया कि कब तक इंतजार करोगे, देर न करो, पंडितजी के चेले को ही ले आओ, शनि को शांत जब करेंगे तब करेंगे, अभी उनकी हल्की-फुल्की नाराजगी तो दूर कर ही लें। जूनियर पंडित को लेने वापस मंदिर में घुसा ही था कि अचानक जोर का धमाका हुआ, एक ब्रेक फेल हाइवा सड़क पर खड़ी मेरी स्कूटर को पूरी तरह रौंदकर नाली में घुस गया। मैं सिहर उठा, अभी कुछ सेकंड पहले ही तो मैं उस स्कूटर पर बैठा था और उसी स्कूटर पर बैठकर पंडितजी की प्रतीक्षा करने का निश्चय किया था!
शनि के प्रकोप से अंत-अंत में क्या छूटा, यह तो मुझे याद नहीं पर अंतिम समय में यदि मैं वापस भीतर न गया होता तो प्राण छूटने का पूरा दोष बेचारे शनि के सिर अवश्य आता!
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