"पापा ! कोई अंकल मिलने आये हैं , कहते हैं विधायक के पीए हैं। "
(तुरंत दौड़कर गेट की ओर जाते हुए )
"ओ ! हो! नमस्कार श्रीवास्तव साहब , आइये आइये , यहाँ बैठिये , इतनी गर्म दोपहरी में क्यों कष्ट किया , फोन कर देते , हम ही आ जाते ...... राजू जा बढ़िया शर्वत ले आ. . "
एक घंटे बाद --
"पापा ! कोई अंकल मिलने आये हैं, कहते हैं प्रोफेसर पाण्डे हैं।"
"ओह ! इनको चेन नहीं है-- राजू! बाहर बिठाओ , बोल दो कि आ रहे हैं। "
-दस मिनट बाद -
"अरे ! आओ पाण्डे जी ! कहो सब ठीक तो है। ओफ् ओ ! गर्मी बहुत है आज , बोलो कैसे आये? "
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