रवि प्रति दिन सूर्योदय से पहले बाबा के साथ एकान्त में घूमने जाता है । एक दिन उसके मित्र विनय ने पूछा कि क्या वह भी उनके साथ प्रातः घूमने जा सकता है?
रवि ने कहा कि यदि एक घंटे बिना बोले रह सकते हो तो भले चल सकते हो। विनय ने कहा, बिलकुल अनुशासन में रहॅूंगा, तुम लोग मेरे घर के सामने से ही तो निकलते हो, मैं पहले से ही तुम लोगों की प्रतीक्षा करता मिला करूंगा, तुम्हें पुकारना भी नहीं पडे़गा...।
अगले दिन विनय यथानिर्धारित प्रतीक्षरत मिला और साथ में चल दिया । थोड़ी देर चलने के बाद पूर्वी क्षितिज में अरुणिमा के साथ सूर्य की मुस्कुराहट से नीरवता में डूबी प्रकृति को खिलखिलाते देख विनय बोल पड़ा ‘‘ वाह क्या सुन्दर दृश्य है‘‘.....।
सभी चुपचाप।
लौटते हुए विनय अपने घर चला गया और रवि बाबा के साथ अपने घर आ रहा था कि इसी बीच बाबा ने कहा
‘‘ तुम्हारा मित्र बहुत बोलता है‘‘।
अगले दिन रवि ने विनय को साथ चलने से मना कर दिया।
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