Sunday, September 13, 2020

103 राज्यादेश


 अंग्रेजी शासन के विरुद्ध चलाये जा रहे आन्दोलन में भाग लेने के उद्देश्य से बुंदेलखंड के एक राजा ने गाॅंधी जी के आमंत्रण पर सलाहकारों के परामर्श पर वहाॅं जाने से पहले अपने राज्य की जनता को सावधान रहने के लिये संबोधित करने हेतु व्यवस्था बनाई। इसके लिये राज्य में शायद पहली बार एक बहुत ऊंचा मंच बनाया गया जिसमें तीन दिन लगे और मुनादी करा दी गयी कि राजा अपनी प्रजा से कुछ कहना चाह रहे हैं इसलिये सभी लोग अमुक दिनाॅंक को किले के मैंदान में उपस्थित रहें।

निर्धारित दिन को राज्य के सभी लोग सबेरे से ही आने लगे और मैदान में यथा स्थान बैठते गये, जिन्हें जमीन पर स्थान न मिला वे मैदान के किनारे बने मकानों की छतांे और पेड़ों की शाखाओं पर जा बैठे। सब की नजरें मंच की ओर लगीं थीं कि कब राजासाब आयें और वे हमसे क्या कहना चाहते हैं, सुनें । अब तक राज्य के संभवतः पहली बार हुए इस आयोजन में प्रजा उत्सुकता और आश्चर्य से बेचैन थी कि आखिर तमाशा क्या होने वाला है। अन्ततः दोपहर में राजासाब अपनी चमकती तलवार लहराते मंच पर आये, और ऊंचे स्वर में बोले-

‘‘ देखो रे ! सबजने अच्छी तरा सें कान दै कें सुन लेव! मोय बुलाव है ओ गाॅंधी ने दिल्ली में, सो मैं तो जा रव हों उतै, तीनक दिन लग जेंहें, सो इतै तुम औरें सबजने शान्त रइयो चाय कोऊ कछु कैत रैवे, समजे? जल्दी लौट आहों।‘‘

यह कहते हुए राजासाब मंच से उतर कर महल की ओर चले गये, प्रजा में  फिर भी देर तक फुसफुसाहट होती रही ... ...‘‘काय रे! काय कई राजा ने, तेंने सुन पाई कछु कै नईं?‘‘

‘‘ आंहाॅ !  मोय तो कछु समजई में नईं आई।‘‘ 

‘‘ बताव तौ ! इत्ती सी बात कैवे खों कित्तो बड़ो तमासौ करौ!‘‘ 

‘‘चलो रे, भग चलो घरै ... ‘‘

.... और, धीरे धीरे मैंदान खाली हो गया।


No comments:

Post a Comment

221 चिंजा की शादी

5 वीं क्लास में पढ़ रहीं स्वभाव से सीधी सादी सहुद्रा और भोली सी चिंजा में गहरी दोस्ती थी। चिंजा की स्पष्टवादिता से क्लास के सभी लड़के लड़किय...