‘‘ पकड़ो, पकड़ो, चोर... चोर... वह भागा, उस टपरे की तरफ ‘‘
‘‘ ए.. ए.. ए.. हाॅं, आ गया पकड़ में , क्यों रे चोरी करता है? इतनी सी उमर में चोरी करने को दिन दहाड़े घर में घुसता है? ‘‘
... और चट चट की आवाज के साथ अनेक थप्पड़ जड़ते हुए दो लोगों ने उसे पकड़ ही लिया। वह रोते चिल्लाते वहीं बैठ गया। इसी बीच दौड़ते हुए दो तीन लोग और आये और अपने अपने हाथ उठाकर बाकी कसर निकालने के लिये पिल पड़े। टपरे में रहने वाले व्यक्ति से नहीं रहा गया इसलिये बोला,
‘‘ अरे भाइयो! इतना क्यों मारते हो छोटा सा लड़का है, पहले पूछ तो लो कि वह घर में क्यों घुसा था‘‘
‘‘ क्यों रे! क्यों घुसा था घर में?‘‘
‘‘ भैया! दो दिन से भूखा हॅूं, इसलिये रोटी पाने के लिये घुसा था‘‘ वह रोते रोते बोला।
टपरे में रहने वाले व्यक्ति ने उसे दो रोटी और भात लाकर दिया जिसको उसने इस प्रकार लपका जैसे बिल्ली चूहे को, और पिटाई के दर्द को भूल तत्काल खाने लगा। पीटने वाले मूक हो यह दृश्य देखते रहे ।
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