Friday, September 18, 2020

127 पारितोषक

  दूरस्थ गाॅंव के स्कूल का निरीक्षण करने हेतु वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे । प्राथमिक शाला की पाॅंचों कक्षाओं में 112 बच्चों में शिक्षक के दायीं ओर पहली और दूसरी कक्षा के छात्र और बाॅंयी ओर तीसरी, चैथी और पाॅंचवीं के छात्र शाॅंतिपूर्वक बैठे शिक्षक द्वारा दिया गया कार्य कर रहे थे।

‘‘ अरे ! सभी बच्चे एक साथ क्यों बैठे हैं ?’’ अधिकारी ने पूछा।

‘‘ सर, पाॅंच क्लासों को अकेला मैं किस प्रकार अलग अलग बैठा कर पढ़ा सकता हॅूं?’’ शिक्षक  डरते डरते बोला ।

‘‘ लेकिन रिकार्ड के अनुसार यहाॅं तो दो शिक्षक पदस्थ हैं?’’

‘‘ परन्तु दूसरे शिक्षक तो आपके ही आदेश से विधायक जी के आफिस में तीन साल से अटैच है, मुझे तो अकेले ही पूरा काम सम्हालना पड़ता है’’

‘‘ अच्छा ! पिछली वार्षिक परीक्षाओं  का रिजल्ट कैसा रहा ?’’

‘‘ सर, पाॅंचवी कक्षा का शतप्रतिशत’’ शिक्षक उत्साह के साथ बोला।

‘‘ अरे वाह ! तुमने यह कमाल कैसे कर दिया ? क्या नकल कराते हो?’’

‘‘ नहीं सर, परीक्षा केन्द्र तो दूसरी जगह रहता है, मेरी ड्युटी उसमें नहीं लगायी जाती क्योंकि मुझे यहाॅं की क्लासें देखना पड़ती हैं।’’

‘‘ फिर सभी बच्चे पास हो जाते हैं यह कैसे संभव है?’’

‘‘ सर, मैं तीसरी, चैथी और पाॅंचवीं के बच्चों को एक साथ पाॅंचवीं की किताबें ही पढ़ाता हॅूं, तीसरी का बच्चा पाॅंचवीं में पहुॅंचते पहॅंुंचते तीन साल में सभी विषयों के पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर याद कर लेता है और लिखने का अभ्यास भी।’’

‘‘ ये बात है, अब समझा। बाबू! इन्हें इनाम अवश्य मिलना चाहिये ’’ अफसर ने सामने खड़े बाबू की ओर देखकर कहा।

.... और बाबू ने तत्काल शिक्षक को निलंबन आदेश थमा दिया।


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