Friday, September 18, 2020

128 गुरु दक्षिणा

रात के ग्यारह बजे अचानक बिजली चली गयी। पंडित हरिहर दरवाजा बंद कर, सोने की तैयारी करने लगे। अचानक पीछे की ओर से किसी के कूदने की आवाज आई। 

‘‘ कौन है? कौन है? .. .. अरे बिजली को भी अभी ... ...’’

 टार्च लेकर ढूॅंडने निकले हरिहर जी ने ज्योंही कौने की ओर टार्च से उजेला फेका उन्हें दो युवक अपना मुॅंह काले कपड़े से ढाॅंके दिखाई दिये।

‘‘ कौन हो तुम लोग? यहाॅं क्यों घुसे हो? जल्दी से बताओ नहीं तो अभी पुलिस को बुलाता हॅंू। हमारा पढ़ाया हुआ छात्र ही यहाॅं का पुलिस इंस्पेक्टर है, बचोगे नहीं समझे?’’

उन लोगों ने हरिहर जी के पास आकर ज्यों ही अपने मुॅंह से कपड़ा हटाया, टार्च की रोशनी में चेहरा पहचान कर वह बोले,

‘‘ अरे! सित्तू तू है ? यहाॅं क्यों आया है, और ये कौन है ?’’

‘‘ हाॅं पॅंडज्जी ! मैं सीताराम और ये है भगवानदास, वही भग्गू जिसे आप रोज मुर्गा बनाते थे’’

‘‘ अरे गधो! क्या पढ़ाते समय मुर्गा बनाने का बदला लेने आये हो? मैं ने तो तभी कह दिया था कि तुम लोग किसी काम के लायक नहीं निकलोगे, बन गये न डाकू? और अब अपने शिक्षक के घर पर ही अंधेरे में डाॅंका डालने आये हो?’’

‘‘ सही कहा पॅंडज्जी, आपने पूरा आशीर्वाद तो रज्जू यानी राजेश को दिया इसलिये वह पुलिस इंस्पेक्टर अर्थात् लाइसेंसी चोर है और हमें आशीर्वाद देने में हमेशा कंजूसी की, फिर भी आपके अभिशाप से ही सही, अब हम हैं इनामी चोर’’

‘‘ ठहरो मैं अभी राजेश को बुलाता हॅूं’’

‘‘ बुला लेना, पहले माल निकालो क्या क्या जोड़ रखा है, तुम्हारे किस काम का है, अकेले तो हो, हमें दे दो सब ’’

‘‘खट खट ! खट खट !’’

‘‘ देखो पॅंडज्जी ! कोई  दरवाजे पर आया है, शायद राजेश ही होगा, बिलकुल चुप रहना नहीं तो ...’’

‘‘ अरे ! राजेश?’’

‘‘ हाॅं पंडित जी ! बिजली देर में आयेगी, अभी खबर मिली है कि दो चोर जेल से निकल भागे हैं और कुछ आतंकी भी इस इलाके में घुस आये हैं इसलिये सतर्क रहना, अंधेरे में कोई भी दुर्घटना घट सकती है, कुछ भी हो तो हमें तत्काल बताना’’ कहते हुए राजेश चला गया।

‘‘ ठीक किया पॅंडज्जी। हमें बचा लिया, इसे आपका आशीर्वाद मान कर अब हमें कुछ नहीं चाहिये, चिंता मत करो हम अभी चले जाते हैं।’’

‘‘ लेकिन तुम लोग इस समय कहाॅं जाओगे? इस गंदे काम को छोड़कर कोई अच्छा काम करो, कब तक छिपे रहोगे, पुलिस के सामने समर्पण कर दो, मैं राजेश से कहकर तुम्हारी सजा माफ करवा दूॅंगा’’

‘‘ पंडज्जी! स्कूल से हमारी और तुम्हारी छुट्टी हो चुकी है, पाठ पढ़ाना बंद करो और ....’’

वाक्य पूरा हुआ ही नहीं था कि फिर से दरवाजे पर खट खट की आवाज आई।

‘‘ देखो ! शायद राजेश को हमारी भनक लग गई है, सावधान रहना समझे? जाकर देखो कौन है?’’

दरवाजा खोलते ही एक आतंकी गन आगे किये हरिहर जी को धक्का देकर नीचे गिराते हुए भीतर घुस आया और बोला,

‘‘बता, कौन कौन हैं घर में,  हमें यहाॅ कुछ दिन रुकना है, हमारे दो साथी और हैं’’

‘‘ मैं तो अकेला ही रहता हॅूं, लेकिन भैया! आप हैं कौन और इस अंधेरे में ही क्यों आये?’’

‘‘ देेख रे बुड्ढे ! ज्यादा सवाल न कर, बस चुपचाप रह, मैं तब तक अपने साथियों को बुलाता हॅूं’’ कहते हुए पास में पड़ी एक बेंच पर बैठ कर अपने साथियों को मोबाइल से संदेश भेजने लगा। इधर सित्तू और भग्गू को समझने में देर न लगी। चुपचाप पीछे से आकर सित्तू ने उसकी गन को और भग्गू ने उसकी गर्दन को जकड़ लिया और झटके से बेंच पर से नीचे पटक कर उसकी छाती पर चढ़ बैठे।

‘‘ बोल.. तू कौन है और तेरा टास्क क्या है? बोल.. नहीं तो तेरी ही गन से तुझे यहीं खत्म कर दॅूंगा।’’

‘‘ क्या तुम लोग भी... ..? ’’

‘‘ हाॅं, हम लोग भी ... ... ? अपना कोडवर्ड बताओ ‘‘’’

‘‘ पुलिस स्टेशन’’

‘‘ अबे साले! झूठ बोलता है। यह कोडवर्ड तो फर्जी है। भग्गू! इसके हाथ पैर बाॅंध दे, इसका बैग और मोबाइल छुड़ा ले। और, पॅंडज्जी आप रज्जू को ... ’’

‘‘ लेकिन तुम लोग ? ’’

‘‘हमारी चिंता न करो, रज्जू के साथ ही हम लोग भी जहाॅं से आये हैं वहीं चले जायेंगे। हमारे  इस काम को अपनी गुरुदक्षिणा समझो, लेकिन अब केवल किताबी ज्ञान से किसी की योग्यता या अयोग्यता का मूल्याॅंकन कभी नहीं करना।’’


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