Friday, September 18, 2020

129 क्षमावीर

लखन अपनी थोड़ी सी खेती और मेहनत मजदूरी से अपने परिवार का पालन ठीक ढंग से कर लेता था परन्तु एक दिन मजदूरी करते हुए उसकी पत्नी फिसलकर गिर गयी और हाथ में फ्रेक्चर हो गया। अचानक हुई इस दुर्घटना के कारण उसे दवा कराने के लिये सेठ धरमचन्द से एक हजार रुपये, पन्द्रह परसेंट ब्याज पर उधार लेना पड़े। समय आते ही वह सेठ के पास जाकर व्याज की राशि जमा कर देता । परिस्थितियाॅं इस प्रकार बनती बिगड़ती रहीं कि दो साल के बाद भी वह एकहजार रुपये एकत्रित कर मूलधन चुका पाने का सामथ्र्य न जुटा पाया। आज भी वह अपने ब्याज की राशि जमा करने नियमतः सेठ के पास पहॅुचा।

‘‘ जुहार सेठ जी ! ’’

‘‘ अरे ! आओ लखन, भई आदमी हो तो तुम जैसा, बिना टोका टाकी के समय पर अपना पैसा जमा कर देते हो, बैठो ! बैठो ! ‘‘ कहते हुए सेठ धरमचंद बही खाता निकालने लगे। इसी बीच पीले वस्त्र पहने दो लोग आये और बोले ,

‘‘ जुहार सेठजी ! आज क्षमावाणी का पर्व है, हमसे जो कुछ भी जाने अन्जाने में भूल हुई हो उसे क्षमा करने की कृपा करें।’’

‘‘ अरे ! जुहार पंडितजी, हम भी आपसे अपनी अब तक की सभी त्रुटियों के लिये क्षमा चाहते हैं।‘‘

लखन सोचने लगा, आज का दिन तो बड़ा अच्छा है, सेठ जी प्रसन्न हैं और सभी को क्षमा कर रहे हैं। क्यों न अपने कर्ज को क्षमा करने की माॅंग कर ली जाये इसलिये बोला,

‘‘ सेठ जी ! ये लो अपना इस माह का ब्याज। अब तक मैं अपने मूलधन से लगभग चारगुना ब्याज आपको दे चुका हॅूं परन्तु मैं एक साथ इतने रुपये नहीं जुटा पा रहा हॅूं कि मूलधन को वापस कर कर्ज से छुटकारा पा सकॅूं। इसलिये आप आज क्षमावाणी के पर्व पर मेरा कर्ज क्षमा कर दें, आज तो सभी को आप क्षमा कर ही रहे हैं ’’ 

‘‘ हें , हें , हें लखन !  सभी लोग क्षमा माॅंग ही रहे हैं न, क्षमा कर कहाॅं रहे हैं, लोग हमसे क्षमा माॅंगते हैं, हम उनसे क्षमा माॅंग लेते हैं बस। इसीलिये हम भी तुम से तुम्हारा कर्जा क्षमा न कर पाने के लिये क्षमा माॅंगते हैं’’ कहते हुए सेठ, लखन के द्वारा दिये गये रुपये गिनने लगे। 

इसी बीच एक सब्जी विक्रेता हाथठेले पर प्याज का ढेर लगाये चिल्लाता आया,

‘‘ दस रुपये किलो, दस रुपया किलो, अब प्याज बिलकुल सस्ती, ले लो सेठ जी दस रुपया किलो,,,’’

लखन से न रहा गया वह बोला, ‘‘ भैया ! प्याज तो हम गरीब लोगों का भोजन है, सेठ लोग प्याज नहीं ब्याज खाते हैं ’’

‘‘ अरे, कहाॅं भूले हो दाऊ! ये तो सेठ धरमचंद हैं जो प्याज भी खाते हैं और ब्याज भी, बोलो सेठ! कितनी तौल दॅूं पाॅच किलो ?’’


No comments:

Post a Comment

221 चिंजा की शादी

5 वीं क्लास में पढ़ रहीं स्वभाव से सीधी सादी सहुद्रा और भोली सी चिंजा में गहरी दोस्ती थी। चिंजा की स्पष्टवादिता से क्लास के सभी लड़के लड़किय...