Sunday, September 20, 2020

145 ठोकर

मिठाई का लालच देकर मेले में से चुराए गए एक गरीब किसान के बेटे ‘गफलू’ को चोरों के सरदार ‘धन्ना’ ने ऐसा ट्रेन्ड किया था कि उसके गिरोह के इस लड़के ने न केवल लोगों को परेशान कर रखा था बल्कि पुलिस की नाक में दम कर रखा था। अंधेरी रातों के मालिक, इस गिरोह में केवल गफलू का ही रिकार्ड था कि अभी तक एक भी रात ऐसी नहीं आई थी जिसमें उसे चोरी में सफलता न मिली हो। गफलू यह मानता था कि उसने धन्ना का नमक खाया है अतः जी जान से उसकी कीमत चुकाएगा। एक बार चोरी के लिए गफलू एक भीड़ भरे पंडाल में जा पहुॅंचा जहाॅं प्रवचनकर्ता कह रहे थे कि,

‘‘ इस प्रकार युद्ध में अजेय भीष्मपितामह और कर्ण मारे गए। वह दोनों, दुष्ट दुर्योधन के पापों को अपनी आंखों के सामने होते देखते रहे और एक बार भी नहीं टोक पाए क्योंकि वे सहज नैतिकता के प्रभाव में आकर यह मानते रहे कि उन्होंने उसका नमक खाया है। यदि उन दोनों ने सहज नैतिकता के स्थान पर आध्यात्मिक नैतिकता को अपनाया होता तो कह सकते थे कि, ठीक है तुम्हारा नमक खाया है इसलिए तुम्हें परामर्श दे रहा हॅूं कि पापकर्म छोड़कर समाज कल्याण करने का सही रास्ता पकड़ लो नहीं तो हम तुम्हारा साथ नहीं देंगे’’

इतना सुनकर गफलू के सुसंस्कार जागे और उसके दिमाग पर ऐसी ठोकर मारी कि वह  वापस धन्ना के पास  पहुंचकर  बोला,

‘‘ ठीक है, तुम्हारा नमक खाया है इसलिए तुम्हें सुझाव दे रहा हॅूं कि पापकर्म छोड़कर समाज कल्याण करने का सही रास्ता पकड़ लो नहीं तो हम तुम्हारा साथ नहीं देंगे ’’

‘‘अबे! माल निकाल, कहाॅं है? क्या आज बड़ा खजाना हाथ लग गया है जो बगावती सुर निकाल रहा है?’’

‘‘ नहीं उस्ताद! खाली हाथ हूॅं, आज कुछ नहीं मिला, पर बहुत कुछ पा गया हॅूॅं और मैं पुलिस के पास सरेंडर करने जा रहा हॅूं।’’


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