Monday, September 21, 2020

151 सबकुछ उल्टा

 

‘‘ गुरु ! आज क्या मौन व्रत है ? चलते चलते एक किलोमीटर हो गया एक शब्द भी नहीं बोले ? ’’

‘‘ हाॅं यार, क्या बताऊं बड़े ही असमंजस में पड़ गया हॅूं। ’’

‘‘ कोई गंभीर चिन्तन प्रताड़ित कर रहा है क्या ? ’’

‘‘  हाॅ, क्या तुम बता सकते हो आजकल धन सम्पन्न कौन हैं ? ’’

‘‘ अरे ! यह कौन नहीं जानता, व्यापारी, राजनेता, डाकू, लुटेरे आदि आदि, सब धनवान हैं ।’’

‘‘ सही कहा, जो जितना कुलक्षणी है उतना ही धनवान देखा गया है। अच्छा, अब ये बताओ विद्वान कौन हैं ?’’

‘‘ ये तो अपने अपने अभ्यास पर निर्भर करता है, यह तो कोई भी हो सकता है ’’

‘‘ नहीं, गलत कहते हो,वे लोग अधिक ज्ञानी और प्रकाण्ड माने जाते हैं जो शीलहीन और अधिक आडम्बरी होते हैं। ’’

‘‘ यार ! सही कहते हो ’’

‘‘ इतना ही नहीं, कुपात्रों को सुशील स्त्रियाॅं मिल जाती हैं, और पानी भी बरसता है तो पहाड़ों पर अधिक ! ’’





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